जमानत याचिका टलने से बौखलाए लालू प्रसाद यादव ने सुनाई राजा-प्रजा की कहानी – आखिर चाहते क्या है लालू…

Lalu Yadav

डेस्क : एक बार फिर इंतज़ार की घड़ियाँ लम्बी हो चली है। मालूम हो कि हाई कोर्ट ने एक बार से लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका टाल दी है। गौरतलब है कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (RJD chief Lalu Prasad Yadav) चारा घोटाले (fodder scam) से जुड़े एक मामले में जमानत अर्जी दी थी। जिसे रांची हाई कोर्ट (Ranchi High Court) ने एक बार से 6 सप्‍ताह के लिए टाल दी है। ऐसे में राजद प्रमुख को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। मिली जानकारी के अनुसार, लालू प्रसाद यादव हाई कोर्ट में अभी तक पूरी की जा चुकी सजा की अवधि के संबंध में कागजात जमा नहीं कर सके हैं। बस इसी जमानत याचिका के टलने पर लालू प्रसाद ने फेसबुक पर एक कहानी पोस्ट की है। इसमें बिना नाम लिए उन्होंने वर्तमान केंद्र व बिहार सरकार पर कटाक्ष किया है।

अपनी पोस्ट के अंत में लालू यादव ने लिखा, ये कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है और इसका आज के हालात और हालिया किसी भी घटना से कोई संबंध नहीं है। हालांकि लालू के पोस्ट को लेकर बिहार की सियासत में कोई खास हलचल तो नहीं हुई, लेकिन चर्चा इस बात की जरूर है कि आखिर लालू का ये कटाक्ष कहीं बार-बार जमानत टलने को लेकर केंद्र सरकार व बिहार सरकार खीझ के कारण तो नहीं है? हालांकि कुछ लोग इसे किसान आंदोलन से भी जोड़कर देख रहे हैं।

लालू ने फेसबुक पर लिखा, एक बार एक राजा को ये जानने की दिलचस्पी हुई कि उसकी प्रजा में कौन लोग एक जागरूक और सजग नागरिक हैं और कौन नहीं। उसने अपने सलाहकारों से मंत्रणा की कि आखिर कैसे जागरूक नागरिकों की पहचान की जाए। किसी ने सलाह दी कि आप पूरी प्रजा पर एक रुपये का टैक्स लगा दीजिये और ये टैक्स जमा करना सबके लिए जरूरी कर दीजिए। राजा को ये सलाह अच्छी लगी। राजा ने आदेश जारी कर दिया कि अमुक तिथि तक सभी लोग एक रुपये का टैक्स राजकोष में जमा करें। राजा सोच में था कि कितने लोगों को इस आदेश के बारे में पता चल पाएगा? आखिर कितने लोग इतने जागरूक हैं कि राजा द्वारा लिए गए फैसलों और आदेशों की जानकारी रख सके और उसका पालन कर सकें।

कहानी आगे बढ़ती है और लालू आगे लिखते हैं, राजा को ये भी उम्मीद थी कि जो सबसे जागरूक और सजग होंगे उन्हें न सिर्फ इस आदेश के बारे में पता चलेगा, बल्कि वो हमारे पास फरियाद लेकर भी आएंगे। इस टैक्स को हटाने का उनसे अनुरोध करेंगे। एक दिन बीता, दो दिन बीत गए, तीसरा दिन भी बीत गया। टैक्स तो बहुत लोगों ने भरा, मगर राजा के पास उस टैक्स के विरोध में फरियाद लेकर कोई नहीं आया। राजा ने सोचा कि शायद ये टैक्स बहुत कम है। लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। सब लोग आसानी से ये टैक्स दे पा रहे हैं। फिर राजा ने टैक्स बढ़ा कर दो रुपये कर दिए। मगर, फिर भी लोगों का टैक्स देना बदस्तूर जारी रहा। विरोध का कहीं भी कोई सुर नहीं। कोई फरियाद लेकर नहीं आया राजा के पास. लोगों का टैक्स देना जारी रहा।

आगे कि कहानी में लालू ने लिखा, राजा ने टैक्स बढ़ाकर तीन रुपये, फिर तीन से चार और चार से पांच रुपये कर दिया। मगर फिर भी लोगों का राजकोष में टैक्स देना जारी रहा। हारकर राजा ने फैसला किया कि सभी प्रजा को न सिर्फ पांच रुपये टैक्स देने होंगे, बल्कि टैक्स जमा करने के बाद उन्हें दो कोड़े भी खाने होंगे। कोड़े मारने के लिए सिपाहियों को तैनात किया गया। राजद सुप्रीमो द्वारा पोस्ट की गई इस पूरी कहानी का सार असल में इस हिस्से में है। लालू ने आगे लिखा, लोग टैक्स जमा करते थे, दो कोड़े खाते थे और अपने घर जाते थे। राजा इंतजार कर रहा था कि अब लोग उनके पास आएंगे। उनसे फरियाद करेंगे कि महाराजा, प्रजा कराह रही है। ये टैक्स और साथ में ये दो कोड़े खाने का नियम हटाइए।

और, सच में कुछ लोग राजा के दरबार में पहुंच गए अपनी फरियाद लेकर। राजा ने पूछा, बोलो क्या शिकायत है तुम्हारी? उन लोगों ने कहा, महाराज, हमें बहुत परेशानी हो रही है टैक्स देने और कोड़े खाने में। आपने कोड़े मारने के लिए बहुत कम सिपाहियों को नियुक्त किया है और इस वजह से लाइन बहुत लंबी हो जाती है। हम आपके पास ये फरियाद लेकर आये हैं कि आप कोड़े मारने के लिए ज्यादा सिपाहियों को नियुक्त कीजिये ताकि लाइन लंबी न लगे और प्रजा को टैक्स जमा करने और कोड़े खाने में कोई परेशानी नही।

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