काम से छुट्टी मिलते ही अपने पैतृक गाँव पहुंचे मिर्जापुर के कालीन भैया – बोले यहाँ आके मुझे अर्थिंग मिलती है

Pankaj Triphati

डेस्क : आज हम आपके एक ऐसी शख्सियत के बारे में बताने वाले वाले हैं जो किसी परिचय के मोहताज नहीं है। बॉलीवुड के चमकते सितारे पंकज त्रिपाठी के अपने ही अंदाज हैं। आपने उन्हें कई फिल्म और OTT प्लेटफार्म पर मौजूद वेब सीरीज पर देखा होगा। वह बिहार का नाम देश-विदेश में रोशन कर रहे हैं। दिन रात चकाचौंध भरी जिंदगी में रहते हुए भी वह अपने देश की मिट्टी को नहीं भूले हैं। पंकज त्रिपाठी को जब भी समय मिलता है, वह अपने घर आकर पर्यावरण की आबो-हवा से रूबरू होते हैं। इन दिनों वह अपने पैतृक गाँव गोपालगंज आए हुए हैं। वह बिहार में आते ही अपने ठेठ बिहारी अंदाज़ में घुल मिल जाते हैं।

बता दें की कोरोना महामारी के चलते वह अपने परिवार से बहुत समय के लिए दूर रहे और हमेशा वह अपने परिवार को याद करते रहे। ऐसे में जैसे ही वह मुंबई से समय निकलकर आए तो उनके घर पर अनेकों युवा लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। सारे युवा उनके पास सेल्फी लेने के लिए पहुंचे हैं। उनका कहना है की हमें जब भी मौक़ा मिले अपने घर जरूर आना चाहिए है और कोरोना के चलते बहुत से ऐसे परिवार हैं जो लम्बे वक्त तक अपने परिवार वालों से नहीं मिल पाए। पंकज त्रिपाठी बताते हैं की मेरी जड़े मेरे गोपाल गंज बरौली के बेलसंड गाँव से जुड़ी है और मैं यहाँ अर्थिंग लेने आता रहता हूँ। जब वह अपने पैतृक निवास पहुंचे तो उनको अतिथि भवन में डीएम डॉ नवल किशोर चौधरी, एसपी आनंद कुमार और सदर एसडीएम उपेंद्र कुमार पाल ने उन्हें थावे महोत्सव का मोमेंटो देकर सम्मानित किया।

पंकज त्रिपाठी ने बताया की अब उनकी नई फिल्म मिमी आने वाली है, इस फिल्म में उन्होंने ग़जब की एक्टिंग की है। उन्होंने हिंदी फिल्मों और वेब-सीरीज़ में ऐसे डायलॉग बोले हैं जो लोगों के दिमाग पर छप गएँ हैं। उन्होंने सीरियस रोल और कॉमेडी के किरदार बहुत अच्छे से निभाएं हैं।

वह कोरोना महामारी से पहले भी वर्ष 2019 में अपने पैतृक गांव गोपालगंज गए थे, जहां पर उन्होंने ग्रामीणों के साथ लंबा वक्त गुजारा और पौधा लगाकर पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया था। जब वह अपने गांव के ट्रिप पर थे तो रोज सुबह सड़कों पर घूमने निकल जाया करते थे। उन्हें गांव के खेतों की हरियाली खूब पसंद है, जिसके चलते वह खुद ही पौधे लगाने लग जाते थे। पंकज त्रिपाठी का साफ कहना है कि सरकार पर्यावरण को बचाने के लिए अनेकों प्रयास कर रही है लेकिन यह प्रयास तभी सफल होंगे जब देश का हर नागरिक पर्यावरण को बचाने के लिए कदम उठाएगा।

ऐसे में उन्होंने 25 फीट की दूरी पर अनेकों पौधे लगाए। उन्होंने बरगद, गुलमोहर और पीपल के पेड़ लगाए। जब पंकज त्रिपाठी अपने गांव में थे तो वह अपने बचपन के दोस्तों से मिले और उनके साथ लिट्टी चोखा खाया। लिट्टी चोखे को उन्होंने खुद ही बनाया था, जिसमें उन्होंने गाय के गोबर से बने उपले का इस्तमाल किया था। इसके बाद उन्होंने आलू बनाया। उन्होंने खुद अपने हाथों से बैगन का चोखा तैयार किया था, बता दे कि लिट्टी चोखा बिहार का सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला व्यंजन है, जो बिहार का लिट्टी चोखा खाता है वह ऊँगली चाटता रह जाता है।

पंकज त्रिपाठी के माता-पिता गोपालगंज में ही रहते हैं, ऐसे में वह अपने माता-पिता से मिलने के लिए 5 दिन के ट्रिप पर आए थे, जिसके चलते उन्होंने सभी ग्रामीण वासियों से मुलाकात की और सभी को एक अच्छा संदेश दिया। वह जिले के एसपी मनोज कुमार तिवारी से भी मिले थे, सभी ने साथ बैठकर लिट्टी चोखा खाया और चाय पी। शाम के वक्त वह मुंबई वापस चले गए।

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