काश उसदिन मैं रामजीवन बाबू की बात मान लेता तो आज ये दिन नहीं देखना नहीं पड़ता

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डेस्क : जैसा की हम जानते हैं की आज के समय में राजद सुप्रीमो लालू यादव चारा घोटाले में दोषी पाए जाने पर जेल की सजा काट रहे हैं। लेकिन उनको इस बात का अंदाजा भी नहीं था की आगे चलकर उनको इतना कुछ सहना पड़ेगा, उन्होंने कहा था की काश मैंने ” राम जीवन सिंह की बात मान ली होती तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता “। राम जीवन सिंह बिहार सरकार में पूर्व कृषि मंत्री की भूमिका निभा चुके हैं। आज हम आपको उन्हीं के द्वारा कही बात का विश्लेषण बताएँगे जो उन्होंने द बेगूसराय के साथ इंटरव्यू में की।

बिहार के पूर्व कृषि मंत्री राम जीवन बाबू ने बात चीत में बताया की 90 के दशक में जब लालू जी का राज था तो उनको लालू जी ने ही कृषि मंत्री बनाया था। इसके साथ ही उनको पशु पालन विभाग भी संभालने को दिया था। वर्ष 1987 और 1988 में एक फाइल आई थी और उसमें लिखा था की आदिवासियों को पालने के लिए 1000 गाय लाइ जाएँगी। लेकिन, हकीकत में कोई भी गाय नहीं आयी थी। उस वक्त कांग्रेस का राज हुआ करता था। इस योजना के तहत हर आदिवासी परिवार को एक गाय दी जानी थी जिससे आदिवासी परिवार का भला हो सके और उनके आर्थिक हालात सुधर सके। उस वक्त एक भी गाय नहीं खरीदी गई थी लेकिन कागजों में गाड़ी, ट्रक और मोटरसाइकिल का नंबर लिखवा कर यह दिखा दिया गया था की गाय को करनाल से लाया गया है और सब आदिवासी परिवारों में गायों को पहुंचा दिया गया है।

लेकिन, सब ने मिलकर कोई गाय ना ली और ना ही दी, हाँ जो पैसा आया उसको जरूर अपनी जेब में भर लिया। इसके बाद जब ऑडिटिंग हुई, यह ऑडिटिंग ऑडिटर द्वारा की जाती है। उसमें बता दिया गया की 1000 में से 750 गाय खत्म हो गईं। उस दौरान इस घपले की फ़ाइल राम जीवन के पास भी आई थी, तब उन्होंने कहा था की सीएम साहब मुझे तो हर जगह घपला ही घपला दिख रहा है। उन्होंने कहा की इसकी जांच आप सीबीआई से करवा दें। उस वक्त लालू जी से यही गलती हुई की जांच के लिए जो फ़ाइल सीबीआई को भेजी जानी थी वह वहीं रुकी रह गई। बस इसी बात पे लालू यादव कहते हैं की अगर मैंने राम जीवन बाबू की बात मान ली होती तो आज यह स्थिति नहीं होती।

धीरे धीरे सरकार आगे चलने लगी और विभाग दुसरे के हाथों में चला गया। लेकिन, राम जीवन ने समझाया की यह मामला चाईबासा ,दुमका और देवघर का है जिसके चलते लालू जी जेल में हैं। जिले की ट्रेज़री से जितना पैसा निकलना चाहिए था उससे ज्यादा निकल गया है। वह कहते हैं कि बिहार में इस वक्त 38 जिले हैं और 38 जिलों का अलग ट्रेज़री होता है। इन सभी ट्रेज़री का रखरखाव कलेक्टर करता है। अगर बेगूसराय की ट्रेज़री से ज्यादा पैसा निकल जाता है तो इसकी खबर मुख्यमंत्री को नहीं होगी, बल्कि यह तो कलेक्टर की ज़िम्मेदारी है की वह ध्यान दे की पैसा कहाँ जा रहा है। इसमें लालू यादव की कोई गलती नहीं है, आखिर मुख्यमंत्री को यह कैसे मालूम होगा कि कहां से पैसा कहां को जा रहा है। यह तो वित्त विभाग का मामला है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो लालू जी बरी हो जाएंगे। वह कहते हैं कि अगर भारत सरकार की तरफ से एक कमेटी गठित की जाए और इस मामले की निष्पक्ष जांच हो तो लालू यादव की सजा खत्म हो सकती है।

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