बिहार में बाढ़ बनी मुसीबत: पटना, भागलपुर समेत कई जिलों में तबाही का मंजर, विभिन्न नदियों का जलस्तर ऊफान पर..

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न्यूज डेस्क : बिहार में हर साल की तरह इस साल भी बाढ़ एक तबाही का रूप लिया हुआ है। कोसी, सीमांचल, मिथिलांचल, समेत विभिन्न इलाकों में बाढ़ का स्थिति उत्पन्न हो गई है। जिससे लोग घरों से बाहर रहने पर मजबूर है। हालांकि, इस बार मानसून की सक्रियता से लगातार हो रही बारिश ने विभिन्न नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की गई है। बताते चले की फिलहाल, गंगा और पुनपुन से पटना तो वही महानंद और उसकी सहायक नदियों के बाढ़ से सीमांचल के पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार जिले प्रभावित हुए हैं। वहीं गंगा नदी के लगातर जलस्तर बढ़ने से पटना, बक्सर, भागलपुर समेत कई जिले प्रभावित हुए हैं।

इन जिलों में गंगा नदी उफान पर. जानकारी का मुताबिक, बक्सर में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 620 सेंटीमीटर नीचे बह रहा है। जलस्तर बढ़ने से रामरेखा घाट, सिद्धनाथ घाट, नाथ बाबा मंदिर घाट की सीढ़ियां गंगा के पानी में डूब गयी हैं। गंगा नदी के जल स्तर में बढ़ोतरी से अब कर्मनाशा नदी में दबाव बढ़ने लगा है। बता दे की गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के जल ग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश की वजह से गंगा नदी का जलस्तर समस्तीपुर के मोहनपुर में खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर हो गया है. यहां खतरे का निशान 45.50 मीटर है। वही भागलपुर के कहलगांव में गंगा खतरे के निशान को पार कर चुकी है यहां खतरे का निशान 31.09 मीटर पर है। लेकिन, यहां अभी गंगा 31.15 मीटर पर बह रही है। मुंगेर, साहेबगंज और फरक्का में भी ये तेजी से बढ़ रहा है। सुल्तानगंज में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से पानी दियारा क्षेत्र में फैल रहा है।

पिछले 24 घंटे में इतने पानी डिस्चार्ज किया गया: प्राप्त जानकारी के मुताबिक, वाल्मीकिनगर बराज से पिछले 24 घंटों में पानी का डिस्चार्ज 1.36 लाख क्यूसेक बना रहा। वही हर बीते दो घंटे में नदी का लेवल घटता-बढ़ता रहा है। पिछले 34 दिनों के बाद नदी खतरे के निशान से एक मीटर से कम हुआ। गुरुवार को नदी खतरे के निशान से 98 सेमी ऊपर रही। पानी का लेवल कम होने के बाद भी अभी भी 28 गांवों में नाव ही सहारा है।

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