चाचा की चाल से भावुक हुए चिराग ने कहा -मुझे तो अपनों ने धोखा दिया दूसरे को उंगली क्यों दिखाऊ

Chirag

न्यूज़ डेस्क : लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में परिवारिक चाचा- भतीजे के बीच जारी घमासान सोशल मीडिया पर एक ट्रेड बन चुका है। बता दें कि एक बार फिर चिराग पासवान ने (Chirag Paswan) ने चाचा पशुपति पारस (Pashupati Kumar Paras) से भावुक अपील की है। उन्होंने चाचा से कहा‌ दिल पर हाथ रखकर बताइये, क्या आज पापा खुश होंगे। आगे उन्होंने बताया जिनकी गोद में मैं खेला उन्होंने अपने हाथ खींच लिए। अब मेरे से बात करने तक को तैयार नहीं है। पहले मैं बीमारी से लड़ा फिर परिवार से लड़ना पड़ रहा है। जब चाचा ने ही पीठ में खंजर घोंपा तो मैं शिकायत कैसे करूं।

उनके दरवाजे पर खड़ा होकर मैंने चिल्लाया लेकिन…. एक निजी चैनल के इंटरव्यू से आगे उन्होंने कहा- मैं चाचा के दरवाजे पर गया। वहां उनके दरवाजे पर खड़ा हुआ। उनसे बस ये रिक्वेस्ट करता रहा कि मुझसे बस एक बार बात कर लीजिए। मैं बेटा हूं आपका, आपने मुझे चलना-पढ़ना सब सिखाया। पापा के बाद आप ही हैं ना मेरे लिए…कौन है मेरे लिए। पापा का निधन हो चुका है। छोटे चाचा का निधन हो चुका है। मैं पापा की छवि उनमें देखता था। अब उन्होंने अपना हाथ खींच लिया मुझसे।

आप ही पार्टी का नेतृत्व कीजिए लेकिन मुझे दूर मत कीजिए: चिराग ने कहा- मेरी मां को भी चाचा के इस रवैये से बहुत दुख हुआ। वो अपने भाइयों की तरह उन्हें मानती थीं। मम्मी ने उनके सहयोगियों, पीए किसको नहीं फोन किया। चिराग ने कहा कि अगर वो मुझसे कहते कि मंत्री बनना था तो मैं खुद प्रधानमंत्री जी को लिखकर देता कि इनको मंत्री बनाइये। पापा का साया मुझपर से उठ गया। अभी तो मुझे इनके अनुभव की जरूरत है। आपके ही मार्गदर्शन पर चलूंगा और किसके चलूंगा। पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना था आप बनिए।

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मुझे तो अपनों ने धोखा दिया दूसरे को उंगली क्यों दिखाऊ: आगे चिराग ने बताया- मैंने आखिर तक पार्टी को बचाने की कोशिश की। मुझसे जो अलग हुए हैं उनमें सिर्फ 9 लोग हैं। बाकी पूरी पार्टी कार्यकारिणी के सदस्य मेरे साथ है। हाल ही में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ये साफ हो गया। चिराग ने ये भी कहा कि जब मेरे अपने ही मुझे धोखा देंगे तो बाकी किसी पर क्या उंगली उठाऊं। जब चाचा ने ही पीठ में खंजर घोंपा तो मैं शिकायत कैसे करूं। चिराग ने कहा कि मैंने हमेशा पीएम मोदी के फैसलों का समर्थन किया, जैसे भगवान राम के लिए हनुमान ने किया था।