पढ़िये- हादसे में दोनों हाथ गंवाने के बाद भी मिसाल बन रही बिहार की तनु , पैरों से लिखकर देगी 10वीं की परीक्षा- पिता ने सरकार से लगाई मदद की गुहार

Tannu Patna Bihar

न्यूज डेस्क : मुसीबत से तू ज्यादा डर या खौफ ना रख, तू जीतेगा ज़रूर एक दिन बस आज हौंसला रख…इसी कहावत को चरितार्थ करके दिखाया है, बिहार की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ की रहने वाली 15 वर्षीय तनु ने…तनु ने अपने परिस्थिति को हौसला बनाया। और आज करोड़ो बेटियों के लिए एक वे मिसाल पेश कर रही है। बता दे की 9 वर्ष की उम्र में ही तनु अपने दोनों हाथ खो बैठी। फिर भी हिम्मत नहीं हारी, और अपनी पढ़ाई जारी रखी। और आज पढ़ाई के साथ-साथ बढ़िया पेंटिंग बना लेती है। हाल ही में पटना के गर्दनीबाग स्कूल में पेंटिंग प्रतियोगिताओं में मेडल भी जीत चुकी है, लेकिन, अब उसे आगे बढ़ने के लिए सरकार की मदद की जरूरत हैं।

तो चलिए आज आपको बिटिया तनु से जुड़े कुछ किस्से बताते हैं। तनु न ही अमीर घराने से आती है..और ना ही मिडिल क्लास फैमिली से बल्कि, एक छोटे कस्बे में रहकर तनु का परिवार उसका हुनर बेचकर अपना भरण-पोषण करता है। पढ़ाई के साथ-साथ वह लगातार खेलकूद में हिस्सा लेती रही है। गर्दनीबाग स्कूल से जलेबी दौर, पेंटिंग सहित कई प्रतियोगिताओं में मेडल और शील्ड जीते, लेकिन अब आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बाधित होने की आशंका है। तनु ने बताया “अभी मेरी उम्र लगभग 15 वर्ष है, और मैं दसवीं की छात्रा हूं। फिलहाल, मेरा अपना पूरा ध्यान मैट्रिक की परीक्षा पर केंद्रित है। बताते चलें कि तनु अपने पांच भाई बहनों में सबसे बड़ी है। उसकी मां शोभा देवी ने बताया वह अपने दोनों हाथ खोने के बाद भी काफी हद तक अपनी दिनचर्या खुद पूरा करती है। पढ़ाई लिखाई से समय बचने के बाद छोटे भाई बहनों को भी पढ़ना-लिखना सिखाती है।

पढ़ाई से समय निकालकर वह खेलकूद और पेंटिंग में भी विशेष रूचि रखती है। पिता अनिल कुमार ने बताया अगर मेरे बेटी को सरकार की तरफ से कुछ आर्थिक मदद मिलेगी तो वह भविष्य में बहुत कुछ कर दिखाएगी। इससे बिहार ही नहीं, देश का नाम भी गौरवान्वित होगा। बता दें कि 2014 के एक भयंकर हादसे में तनु अपने दोनों अपने हाथ को गवा बैठे। जब तनु ने खेल-खेल में अचानक बिजली के एक रॉड को पकड़ लिया था। इसके बाद तनु के दोनों हाथ पूरी तरीके से झूलस गए। इस कारण उसके दोनों हाथ गंवाने पड़े थे। उस वक्त तनु क्लास 4 की छात्रा थी। इसके बाद भी उसने हार नहीं माना और अपनी जिंदगी को फिर से शुरू करने की ठानी। उसने अपने हाथ के बदले पैर को ही अपना हाथ बना लिया।

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