बिहार का पटना एयरपोर्ट थरथराता है, कैसे दे रहा है खतरों को आमंत्रण ? पढ लें

डेस्क : पटना का एयरपोर्ट खतरनाक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पटना के रनवे पर विमानों के उतरने के बाद ब्रेक इतनी जोर से लगता है कि विमान में बैठे यात्रियों तक के पहिए की थरथराहट का साफ असर होता है और इसकी कंपन से यात्री भी घबरा जाते है। दूसरा सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसका परिसर काफी छोटा है एयरपोर्ट पर उड़ान भरने और उतरने वाले विमान परिसर के छोटा होने की वजह से काफी नीचे उडते और उतरते है यदि विमान को इतना निचा ना किया जाए तो लैंडिंग के दौरान टचडाउन से विमान के आगे निकलने का खतरा होता है। रनवे के खत्म ही महज चंद फलांग पर एयरपोर्ट की बाउंड्री है ऐसे में एक बड़े हादसे का परिणाम हो सकती है।

पटना एयरपोर्ट का तीसरा सबसे बड़ा खतरा सचिवालय का वाच टावर है, इसलिए विमानों की लैंडिंग और उड़ान भरने का कारण पायलट को हर पल सतर्क रहना होता है कि अगर विमान के पहिए सही जगह पर रनवे को टच नहीं कर रहे हो और दोबारा उड़ान भरने की स्थिति पैदा हो तो इस टावर से ना टकराय। एयरपोर्ट का चौथा खतरा दूसरे छोर पर रेलवे की पटेरिया है। इन पटरियों के उपर बिजली के तार वह पोल हैं जिससे रेलवे परिचालन होता है इन पोल की उंचाई भी विमान के लिए बड़ा खतरा है और यही वजह है कि 65 सौ मीटर लंबे रनवे का भी इस्तेमाल ठीक से नहीं हो पाता है। पटना एयरपोर्ट एक और खतरा है यह अगल-बगल खुली मास मछलियों की दुकानों है जोकि आसमानी खतरे को बुलावा देते हैं और अक्सर विमान परिंदों से टकरा जाते हैं जिससे इनके असंतुलन का खतरा बना रहता है। इस बाबत एयरपोर्ट की ओर से अक्सर स्थानीय अधिकारियों से गुहार लगाई जाती है लेकिन कुछ दिन की सख्ती के बाद मामला ठंडा हो जाता है।

पटना हवाई अड्डा, जिसका रनवे केवल 2,072 मीटर लंबा है और जिसमें पूर्व से आने वाली फ्लाइट्स की लैंडिंग के लिए 1,938 मीटर तथा पश्चिम से आने वाली फ्लाइट्स की लैंडिंग के लिए 1,677  मीटर स्थान है, आपदाओं से ग्रस्त है। संघीय विमानन प्रशासन (अमेरिका) के आंकड़ों के मुताबिक, बोइंग 737 और एयरबस ए 320 की सुरक्षित लैंडिंग के लिए आवश्यक पर्याप्त रनवे लंबाई 2,300 मीटर होनी चाहिए। ये दो प्रमुख यात्री विमान हैं जो आमतौर पर पटना हवाई अड्डे से बाहर भेजे जाते हैं।

बिहटा एयरपोर्ट निर्माण में अभी है देरी बिहटा में एक नागरिक एयरपोर्ट को विकसित करने की योजना है हालांकि अभी एयरपोर्ट की डिजाइन को लेकर काम चल रहा है और निर्माण की प्रक्रिया ठीक से शुरू नहीं हुई है। शुरूआत में तो इसे 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अभी स्थिति को देखते हुए लग रहा है कि इस काम में काफी समय लगने वाला है। यह एयरपोर्ट फिलहाल हवाई सेना के जिम्मे है जिसके रनवे की लंबाई लगभग 9000 फीट तक बढ़ाने की के लिए जमीन की डिमांड की गई है। लेकिन समस्या यह है कि यहां भी जमीन उपलब्ध ना होने की वजह से विमानों को उतरने में मुश्किल होगी।