अब बिहार के शिक्षकों को रास नहीं आ रही वेतन वृद्धि, जुमला और लॉलीपाप बता रहे लोग

डेस्क : बिहार सरकार ने राज्य के लगभग पौने चार लाख नियोजित शिक्षकों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है. बिहार सरकार ने बिहार के नियोजित शिक्षकों और पुस्तकालय अध्यक्षों के वेतन में वृद्धि की घोषणा करने के साथ ही उनके लिए नई सेवा शर्त नियमावली को पारित कर दिया है, लेकिन शिक्षक इसका लाभ लेने से पहले इससे महज एक चुनावी जुमला और लॉलीपॉप की संज्ञा दे दिया है. बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लिए गए नीतीश सरकार के इस फैसले को नियोजित शिक्षकों का सभी संघ पसंद नहीं कर रहे हैं और इस वेतन वृद्धि को भी ऊंट के मुंह में जीरा बता रहे हैं।

5 सालों में 60% वेतन वृद्धि! इन शिक्षकों का कहना है कि नीतीश जी ने तो हमें चिढ़ाने का काम किया है. सेवा शर्त के पढ़ने से ही सारी बातें स्पष्ट हो जा रही है. शिक्षकों के इस आरोप के बीच सरकार का दावा है कि 5 सालों में 60% वेतन वृद्धि की गई है.विभाग के वरीय अधिकारी आरके महाजन के मुताबिक 1 जुलाई 2015 में इन शिक्षकों के लिए वेतनमान लागू किया गया है. उस समय 20% वेतन वृद्धि की गई थी. 2017 में सातवां वेतनमान के अनुरूप 17% की वृद्धि की गई. वर्तमान में ईपीएफ को मिलाकर करीब 20% की वेतन वृद्धि की जा रही है इस प्रकार 5 सालों में 60% वेतन बढ़ा है।

नई सेवाशर्त नियमावली को मिली मंजूरी बीते मंगलवार की शाम सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई. इस बैठक में राज्य सरकार की नई सेवा शर्त नियमावली को मंजूरी दे दी. अब इसका सीधा फायदा बिहार के करीब पौने चार लाख शिक्षकों को होगा. शिक्षकों के मूल वेतन में जहां 15 फ़ीसदी की वृद्धि होगी वही उनके उनको अब कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) का लाभ मिलेगा. सरकार शिक्षकों को सितंबर 2020 से EPF का लाभ देगी जबकि मूल वेतन में 15% की वृद्धि का लाभ 1 अप्रैल 2021 से मिलेगा।

कला दिवस के दिन सीएम-डिप्टी सीएम का फूंकेगे पुतला आपको बता दें कि बिहार सरकार के इस निर्णय के बाद टीईटी,एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ ने कला दिवस के दिन पूरे राज्य में सीएम-डिप्टी सीएम का पुतला और नई सेवा शर्त नियमावली की प्रति जलाने का ऐलान किया है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने चुनावी लॉलीपॉप देखकर उनके साथ छलावा किया है। बिहार के शिक्षको को ना तो राज्य कर्मी, ना सहायक शिक्षक का दर्जा दिया गया है और ना ही उनको पूर्ण वेतनमान का लाभ मिला है। शिक्षक हमेशा खुश रहते हैं उन्हें जबरन खुश करने की कोशिश नहीं करना चाहिए।