जहां से पढ़ने वाला बना बिहार का पहला डॉन, उसके पास पुलिस से पहले थी AK-47, आज 122 साल का हुआ वह कॉलेज

Ashok Samrat

न्यूज़ डेस्क : स्वतंत्रता आन्दोलन के समय आज़ादी के दीवाने लोगों तथा प्रसिद्द समाजसेवी लंगट सिंह के प्रयास से 3 जुलाई 1899 को पुरे विश्व में अपनी छाप छोड़ने वाले लंगट सिंह कॉलेज L S कॉलेज की स्थापना हुई। यह कॉलेज बिहार के हृदयस्थली समान मुज्जफरपुर शहर में स्थित है। इस महाविद्यालय की ख्याति किसी परिचय की मोहताज नहीं है। यहाँ के प्रधानाचार्य देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद भी रह चुके‌ है। महात्मा गाँधी भी चंपारण यात्रा के क्रम में 10 अप्रैल 1917 को कॉलेज परिसर में आये थे ।

बता दे की आज इसी महाविद्यालय का 122 वां स्थापना दिवस है। कालांतर में गिरते शिक्षा स्तर के कारण शिक्षण संस्थानों की भी खूब फजीहत होती है। इस महाविद्यालय से बेगूसराय का भी कनेक्शन जुड़ा हुआ है। एक समय था‌ जब इसी कॉलेज से बिहार का पहला डॉन जिसका घर बेगूसराय जिला में है । वह यहां से MA करके निकला था। जब पुलिस को AK-47 रायफल की जानकारी तक नहीं थी तब उस डॉन की AK47 की गर्जना से पूरा यूपी-बिहार गूंज उठा था। 90 दशक में यह कॉलेज डॉन की फैक्ट्री के रूप में जाना जाने लगा । जब बिहार के अलग अलग कॉलेजों में जब छात्र डीएम, एसपी, इंजीनियर, डॉक्टर सहित अच्छे पदों पर पहुँचने के लिए पढाई करने की लालसा लेकर दाखिला लेते थे। तो वही इस कॉलेज में दाखिला लेने वाले अधिकांश छात्र डॉन बनने की तम्मन्ना पालकर यहाँ आते थे।

वह डाॅन जिसकी AK 47 की हनक आज भी गूंजती है : हम बात कर रहे हैं, 90 के दशक के उस बाहुबली की जिन्होंने बिहार में पहली बार AK-47 लाकर अपना नाम कमाया था। यहां तक कि जब उस समय बिहार पुलिस ने भी एके-47 को नहीं देखा था। तब वह उसे इस्तेमाल करता था। बिहार पुलिस के पास उसका कोई फाईल फोटो भी नही था। कहानी है बेगूसराय के बाहुबली अशोक सम्राट की…जब भी 90 के दशक में अपराधियों का नाम लिस्ट में आता है। तो सबसे पहले नंबर पर अशोक सम्राट का नाम जिक्र किया जाता है। क्योंकि, उसके लिए कानून कोई मायने नहीं रखता था। सिर्फ अपनी मर्जी की सुनता था। अशोक अपने दौर के सबसे बड़े बाहुबली यूं कहें कि गैंगस्टर थे। उनकी तूती बेगूसराय से गोरखपुर तक बोलती थी।

यह प्रश्न आज भी है एके-47 कहां से आया : मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उस समय सम्राट के बारे में दो तरह की अफवाऐ चलती रहती थी। पहला यह कि सूरजभान से खुद को बीस साबित करने के लिए उसने पंजाब में सक्रिय खालिस्तान आतंकियों से हाथ मिला लिया था। जिन्होंने उसे एके-47 राइफल की सप्लाई की थी। जबकि, दूसरा यह कि उसके संपर्क सेना में शामिल कुछ युवाओं से थे। जिसकी वजह से आतंकियों के पास से जब्त एके-47 राइफल चोरी से उसके पास आ गए थे। लेकिन, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वह एके-47 कहां से लाया था।

उस समय बेगूसराय के SP गुप्तेश्वर पांडेय हुआ करते थे: जिस समय अशोक सम्राट का बोलबाला बेगूसराय में हुआ करता था। उस समय बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय उस समय के तत्कालीन एसपी हुआ करते थे। उन्होंने-ही सबसे पहले अशोक सम्राट गिरोह के लोगों से AK47 और सूरजभान सिंह के घर से AK 56 की जब्ती की थी। गुप्तेश्वर बताते हैं “उस समय अशोक सम्राट पूरे बिहार का सबसे बड़ा अपराधी हुआ करता था। वह कानून को कुछ समझता ही नहीं था। 1993-94 में बेगुसराय में 42 मुठभेड़ हुए, जिसमें इतने ही लोग मारे गए। सबसे पहले एके-47 से हत्या 1990 में अशोक ने ही कि थी। अशोक ने अपने पीए की हत्या का बदला लेने के लिए मुजफ्फरपुर के छाता चौक पर AK 47 की गर्जना दिखाई थी। छाता चौक पर दिन दहाड़े अशोक सम्राट के गुर्गों ने थाने के ठीक बगल में बाहुबली चंद्रेश्वर सिंह की हत्या की थी।

अशोक की मर्जी से चुनाव होता था: 90 के दौर अशोक के ताकत के पीछे राजनीतिक दबाव भी हुआ करता था। माना जाता है कि अशोक का उस दौर के मंत्री और लालू प्रसाद यादव के करीबी रहे बृजबिहारी प्रसाद से काफी अच्छे रिश्ते थे। अशोक ही तय करता था कि बेगुसराय, मोकामा, मुजफ्फरपुर, और इसके आसपास के इलाकों में किन उम्मीदवारों को जिताना है। ‌ किसी तरह उनके लोग डरा धमकाकर वोट दिलाते थे।

अंत में पिस्टल के सामने एके-47 हो गया फेल : बता दें कि उस सम‌य के सबसे जांबाज सिपाही शशिभूषण शर्मा ने ही अशोक सम्राट को पिस्टल से छल्ली कर दिया था। उस समय अशोक का एके-47 कुछ नहीं कर पाया। बता दे शशि भूषण अपनी पूरी नौकरी में 35 लोगों को एनकाउंटर किया था। बताया जाता है कि 5 मई 1995 को हाजीपुर के लक्ष्मण दास मठ के पास पुलिस और अशोक समाज के बीच मुठभेड़ हो हुआ था। जिसमें अशोक पुलिस की जवाबी कार्रवाई में भागने लगा पुलिस वालों ने फायरिंग जारी रखा। इसी में अशोक का एनकाउंटर हो गया। इस एनकाउंटर के बाद अशोक सम्राट के पास से दो AK-47 बरामद की गई। अशोक का इनकाउंटर के बाद उन्हें आउट ऑफ टर्म प्रमोशन मिला। शर्मा को प्रेसिडेंट मेडल तक से नवाजा गया। वह डीएसपी बना दिए गए।

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