बिहार में कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवाल, लोजपा ने की राष्ट्रपति शासन की मांग

डेस्क : इस वक्त बिहार में आपराधिक घटनाओं की बाढ़ आ चुकी है। इन अपराधों को देखते हुए लोजपा पार्टी ने सत्तारूढ़ पार्टी के ऊपर आरोप लगाया है और कहा है कि जब से नई सरकार बनी है तब से बिहार राज्य में अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है। लोजपा ने राष्ट्रपति शासन की मांग की है इस बात को लेकर एनडीए के कई नेता सरकार का बचाव करने के लिए मैदान में उतर गए हैं।

हाल ही में लोजपा पार्टी ने बिहार में होने वाले दैनिक आपराधिक घटनाओं पर मोर्चा खोला है और वह सत्तारूढ़ पार्टी को बख्शते नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में लोक जनशक्ति पार्टी की ओर से राष्ट्रपति शासन की मांग करते हुए लोजपा पार्टी ने कहा कि अगर राष्ट्रपति शासन लागू होता है तो कानून व्यवस्था में बदलाव आएगा और साथ ही अपराधिक मामले रुक जाएंगे। ऐसे में लोजपा के बिहार मीडिया प्रभारी कृष्णा सिंह कल्लू द्वारा एक पत्र भेजा गया है जो अमित शाह से आग्रह करता है कि कृपया करके बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए।

सरकार की तरफ से जो सात निश्चय लागू किया गया वह एक जंगलराज की तरह है ऐसे में नीतीश कुमार के शासन पर जमकर हमला बोलने वाले प्रवक्ता राजेश भट्ट का कहना है कि 7 निश्चय पार्ट 2 जंगलराज पार्ट 2 के सामान है। कांग्रेसी नेता प्रेमचंद्र मिश्रा का कहना है कि बिहार में एक फुल टाइम गृहमंत्री चाहिए जिस तरह से आए दिन दुष्कर्म, लूटमार, चोरी, डकैती हो रही है। उससे निजात पाने का सिर्फ एक यही रास्ता बचा है। राजद पार्टी के नेता तेज प्रताप यादव ने भी क्राइम कंट्रोल का हवाला देते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री सिर्फ बैठक में उलझे रहते हैं बिहार के अपराधिक घटनाओं को लेकर उन्होंने कुछ ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

ऐसे में जन लोकतांत्रिक दल के नेता का बचाव में कहना है कि बिहार में अपराधिक घटनाएं औसत स्तर से नीचे हैं और यह तार्किक संकेत है साथ ही हमारे मुख्यमंत्री अपराधिक घटनाओं को लेकर हमेशा चिंता में रहते हैं, ऐसे में कई पार्टियों के नेताओं पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं जो बिल्कुल गलत है। इस वक्त वह लोकतंत्र का गलत फायदा उठाते हैं और कुछ भी बोलते हैं।