बेगूसराय से दिल्ली के लिए निकले दो साथी में एक की बस दुर्घटना में गयी जान, दूसरा अस्पताल में भर्ती

Begusarai Se Delhi

न्यूज डेस्क , बेगूसराय : कोरोनाकाल में लॉक डाउन लगने के बाद ट्रेन का परिचालन पूर्णतः ठप हो गया था । जिसके बाद अनलॉक होने के दौरान आंशिक रूप से स्पेशल और क्लोन ट्रेन की परिचालन शुरू हुई । दूसरे तरफ लोगों के आवाजाही में देश भर के कोने कोने बसों का परिचालन एकाएक काफी बढ़ गया । इस कड़ी में बेगूसराय जिले के भी अलग अलग क्षेत्रों से दिल्ली के लिए खुलने बाली बसों की संख्या में एकाएक इजाफा हुआ। जो बीते कुछ महीनों के अंतराल में बढ़ता चला गया। अपने साथी के साथ बेगूसराय से दिल्ली के लिए निकले एक व्यक्ति की मौत बस से दिल्ली जाने के क्रम में बस हादसा में हो गयी।

मिली जानकारी के अनुसार यूपी के कुशीनगर सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी। बताया जाता है कि बेगूसराय जिले के बलिया नगर पंचायत के वार्ड नंबर 14 मसूर चक निवासी उपेंद्र दास की मौत यूपी के कुशीनगर में सोमवार की रात सड़क हादसे के दौरान हो गई। मौत की खबर मिलते ही गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। मृतक के परिजनों के बीच कोहराम मचा हुआ है। मृतक उपेंद्र दास दिल्ली के संगम विहार स्थित मस्जिद वाली गली नंबर 2 में किराये के मकान में वर्ष 1996 से रहकर टाइल्स फिटिंग करने का काम करता था। छठ पूजा के समय वह त्यौहार मनाने अपने घर आया था। जिसके बाद सोमवार को वह अपने ग्रामीण साथी 23 वर्षीय पप्पू दास के साथ बस से दिल्ली जा रहा था। रास्ते में ही यूपी के कुशीनगर के समीप बस के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से उसकी मौत घटनास्थल पर ही हो गयी। जबकि उसका साथी पप्पू कुमार दास गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसका इलाज स्थानीय अस्पताल में किया जा रहा है।

दुर्घटना की खबर सुनकर पांच ग्रामीण यूपी रवाना सड़क हादसे में उपेंद्र की मौत होने की सूचना पर गांव से पांच ग्रामीण जिसमें प्रदीप दास, गोपाल कुमार दास, विजय दास, अनील दास एवं मृतक के पुत्र पृथ्वी कुमार आदि निजी वाहन से घटनास्थल की ओर मंगलवार की सुबह रवाना हो चुके हैं. परिजनों ने बताया कि मृतक के दो पुत्र एवं तीन पुत्री है. जो सभी काफी छोटे-छोटे हैं. पिता की मौत हो जाने से पांचों बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. मृतक की पत्नी बॉबी देवी घटना की सूचना पाकर रो-रो कर बेसुध सो रही थी . वहीं मृतक के सभी छोटे छोटे बच्चे मां में लिपटकर रो रहे थे वही आसपास के लोगों के द्वारा संताना देने वाले आने जाने वाले लोगों का भी आंखें नम हो जा रही थी। ढांढस बांधने के समय ग्रामीण भी अपने आप को रोक नहीं पा रहे थे सांत्वना देते हुए आंखों से आंसू छलक रहे थे जिसे सान्त्वना देने के लिये ग्रामीणों की भीड़ लगी हुई है. ग्रामीणों को मृतक के शव आने का आने की राह देख रहे हैं।

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