तत्कालीन शिक्षा मंत्री व नगर विधायक अमिता भूषण ने ठगने के लिए उप केंद्र के बदले विस्तार केंद्र का दिया झुनझुना

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बेगूसराय : जिले में उच्च शिक्षा के नाम पर जीडी कॉलेज में मास्टर डिग्री की पढ़ाई के अलावा जिला भर में कुछ नहीं होता है। बिहार की औद्योगिक राजधानी कहे जाने बाले बेगूसराय में मेडिकल , इंजीनियरिंग सहित वोकेशनल कोर्स की बात तो दूर प्रोफेशनल शिक्षा के नाम पर छात्र हलकान होते रहते हैं।बिहार सरकार के साथ साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों में जिला में शैक्षणिक विकास को लेकर कोई भी सार्थक प्रयास नहीं किया है। बेगूसराय के जीडी कॉलेज , एसबीएसएस कॉलेज , एसके महिला कॉलेज , आरसीएस कॉलेज मंझौल , एपीएसएम कॉलेज , वित्तरहित आरसीएसएस कॉलेज बीहट , आर बी एस कॉलेज तियाय सहित कुल सात डिग्री कॉलेज के हजारों छात्र छात्राएं छोटे छोटे कामों को लेकर एक सौ बीस किलोमीटर दूर दरभंगा स्थित मिथिला विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने को विवश हैं।

इस बीच तत्कालीन शिक्षा मंत्री व वर्तमान में जदयू सरकार में मंत्री अशोक चौधरी व सदर विधायक अमिता भूषन , स्थानीय सांसद स्व डॉ भोला सिंह, तत्कालीन विश्वविद्यालय कुलपति प्रो एसके सिंह , जीडी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ अवदेश सिंह सहित आदि कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति में जीडी कॉलेज में स्थापित और उद्घाटित मिथिला विश्वविद्यालय का विस्तार केंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। साथ ही चार साल बाद अब भी अपने उद्घाटक की बाट जोह रहा है।

विस्तार केंद्र या झुनझुना जीडी कॉलेज के छात्र संघ अध्यक्ष पुरषोत्तम कुमार ने बताया कि 12 जुलाई 2016 का दिन बेगूसराय के छात्र छात्राओं के लिए ऐतिहासिक हो सकता था लेकिन कॉलेज प्रशासन, विश्वविद्यालय प्रशासन एवं कुछ तथाकथित छात्र संगठनों के कारण यह दिन छात्र छात्राओं के लिए काला दिन बन गया। खास राजनीतिक दल से संबंध तत्कालीन शिक्षा मंत्री ,नगर विधायक एवं उनके पार्टी के छात्र संगठन ने छात्र छात्राओं को ठगने के लिए उप केंद्र के जगह विस्तार केंद्र का झुनझुना थमाया। वह भी कॉलेज प्रशासन और विश्व विद्यालय प्रशासन के आपसी वर्चस्व की बलि चढ़ गया।

आज तक दोनों एक दूसरे पर इसकी जिम्मेदारी थोप रहे हैं पिछले दिनों विश्वविद्यालय छात्र संघ और कॉलेज छात्रसंघ के अथक प्रयास के बाद विश्वविद्यालय द्वारा एक पत्र जारी कर दो अस्थाई कर्मचारी की नियुक्ति करने एवं छात्र छात्राओं से आवेदन प्राप्त कर विश्वविद्यालय भेज कर कामकाज शुरू करने का आदेश दिया गया, किंतु कॉलेज प्रशासन आज तक उस पर कार्य नहीं कर पा रही है। लॉकडाउन खुलते ही एक बड़ा आंदोलन खड़ा करके कॉलेज प्रशासन विश्वविद्यालय प्रशासन व छात्रों की ठेकेदारी करने वाले छात्र संगठन का पोल खोला जाएगा।