सिस्टम के पेंच में फंस गया मृत शिक्षक के बच्चों का निवाला, मां ने कर ली दूसरी शादी , अब दादी भी चल बसी

न्यूज डेस्क , बेगूसराय : लापरवाह अधिकारियों की ऐसी कहानी आपने सायद आजतक कभी न सुना हो । सेवाकाल में शिक्षक पिता की मृत्यु हो गई परंतु, शिक्षा विभाग ने मृत शिक्षक के आश्रित को कोई सेवालाभ नहीं दिया। पिता के मृत्यु के पश्चात मां ने 5 से दस वर्ष के 3 मासूम छोटे-छोटे बच्चों को छोड़ एक रात घर से गायब हो कर दूसरी जगह शादी कर ली। दूसरी तरफ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जमा 10 लाख रुपये भी 5 साल में भी बच्चों को नहीं मिल सका।

बच्चों के एकमात्र सहारा वृद्ध दादी भी फरबरी माह में चल बसी। 12,10 एवं 6 वर्ष के अबोध तीन भाई-बहन के समक्ष अब खाने की समस्या उत्पन्न हो गई है। बच्चों का आगंतुकों से बस एक गुहार कि अब मेेरा क्या होगा। यह कोई फिल्मी पटकथा नहीं है। बल्कि, बेगूसराय जिल के छौड़ाही प्रखंड के मालपुर गांव के सिस्टम के फंदे में फंस कर दाने-दाने को मोहताज तीन मासूम बच्चों की हकीकत है। ग्रामीणों ने भी बच्चों की बात कि लिखित पुष्टिकर जिला अधिकारी तक को भेजा है।

ये है बेगूसराय के छौड़ाही प्रखण्ड के इस गांव का मामला : छौड़ाही प्रखंड के मालपुर निवासी नियमित शिक्षक गंगाविष्णु यादव जमुई में कार्यरत थे। सेवाकाल में हीं उनकी मौत हो गई। स्वजनों ने काफी भागदौड़ की लेकिन शिक्षा विभाग के बाबुओं के फेर में आज तक एक रुपैया का भी सेवा लाभ शिक्षक के स्वजनों को नहीं मिल सका। पति के मौत के छह माह बाद ही एक रात तीन अबोध बच्चों को छोड़ पत्नी घर से गायब हो दूसरी शादी कर ली। दूसरी तरफ मृत शिक्षक के नाम पर हसनपुर स्टेट बैंक में 10 लाख रुपये जमा है। आश्रित सैकड़ों बार बैंक का चक्कर लगा चुके हैं। लेकिन बैंक मैनेजर मृत शिक्षक को ही हाजिर करने की बात कह दावा भुगतान 5 साल बाद भी नहीं कर सके हैं।

बच्चों के सामने भूखे मरने की आ गयी है नौबत मेहनत मजदूरी कर 3 मासूम पोते पोतियो का पालन कर रही वृद्ध दादी 65 वर्षीय साजो देवी की मौत भी फरबरी माह के 20 तारीख को हो गई। तीनों बच्चे लिपटकर रो रहे थे।अबोध बच्चे अंशु कुमार, अन्नू कुमार, अंकित कुमार के मुंह से बस एक आवाज कि शिक्षा विभाग और बैंक के चक्कर में पिता की मौत हो गई। मां भाग गई, दादी भी चल बसी घर में खाने का एक दाना नहीं है। कोई देखने वाला नहीं बचा अब हम लोग का क्या होगा।

इस संदर्भ में सरपंच समेत रंजीत यादव परमानंद यादव कुंदन कुमार ब्रह्मानंद यादव रंजना देवी चंदन कुमार परशुराम यादव आदि सैकड़ों ग्रामीणों ने आवेदन अंचलाधिकारी एवं डीएम को भेजकर बच्चों के परवरिश की गुहार लगाई है। अधिकारियों को भेजे गए आवेदन में शिक्षा विभाग के प्रेशर में शिक्षक की मौत होने, आश्रितों को अब तक सेवा लाभ नहीं देने, बैंक के द्वारा आश्रितों को भुगतान नहीं करने , बच्चों की भुखमरी की स्थिति के संबंध में विस्तार से जानकारी दिए जाने के एक महीने बाद तक कोई भी सुनने बाला नहीं है।