बेगूसराय में जन्म के बाद बच्चा रोया नहीं, नर्सों के द्वारा पुनर्जीवन प्रक्रिया दी गई तो बच्चे में सांस आई

New Born Baby

न्यूज डेस्क , बेगूसराय : जिले के तेघड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत जीएनएम नर्स रति रानी कुमारी और राधा कुमारी ने 22 फरवरी की शाम लगभग साढ़े चार बजे सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए आई 21 वर्षीय कोमल कुमारी के एन्टी पार्टम हरमैच्योर (एपीएच ) एंड फीटल डिस्टर्ब कॉम्प्लिकेशन की न सिर्फ रहते पहचान कर ली बल्कि बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय रेफर भी कर दिया। मालूम हो कि प्रसूता कोमल कुमारी तेघड़ा के करतौल वार्ड 13 निवासी भरत कुमार की पत्नी है। जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर 3816/22.02.2021 है। जीएनएम रति रानी कुमारी और राधा कुमारी के द्वारा सही समय पर प्रसूता की एपीएच कॉम्प्लिकेशन की पहचान कर सदर अस्पताल बेगूसराय रेफर करने के बाद प्रसूता ने शाम साढ़े छह बजे लड़के को जन्म दिया।

पीएचसी तेघड़ा पर कार्यरत जीएनएम रति रानी कुमारी और राधा कुमारी ने बताया कि 22 फरवरी की शाम लगभग साढ़े चार बजे आशा प्रमिका सहनी ने आकर मुझे बताया कि वो कोमल कुमारी के रूप में संस्थागत सुरक्षित प्रसव के लिए एक पेशेंट को लेकर आई है। इसके बाद जब मैं एग्जामिनेशन ट्रे औऱ केसशीट के साथ कोमल के पास गई तो देखा कि वो बहुत सुस्त है। मुझे वो डिहाइड्रेशन से पीडित दिखी, उसका शरीर भी काफी कांप रहा था। इसके बाद सेंसर थर्मामीटर लगाकर सबसे पहला टेम्परेचर लिया जो 97.6 फारेनहाइट था, पल्स रेट 60 बी/एम और बीपी 90/60 एमएमएचजी था।

उसके बाद मैंने पूछा कि क्या हो रहा है तो उसके साथ आई सास ने बताया कि खून निकल रहा है। मैंने देखा कि उसका पूरा कपड़ा खून से भींगा हुआ था। फिर मैंने पूछा कि कब से खून आ रहा है तो उसकी सास ने बताया कि दोपहर बाद डेढ़ बजे से ही खून जा रहा है। फिर हमलोगों ने आइवी लाइन सेट करने के बाद आरएल लगाया और एफएचएस मिलाया और कोमल को ओ 2 इन हाफ लगाया और आइवी लाइन लगाकर तेज चलाई क्योंकि वो मुझे डिहाइड्रेट लग रही थी। इसके बाद मैंने कोमल की सास को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय ले जाने की सलाह देकर रेफर फॉर्म भरने लगी।

इसके बाद एम्बुलेंस की सहायता से कोमल को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। आशा से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोमल ने शाम लगभग साढ़े छह बजे एक लड़के को जन्म दिया लेकिन जन्म के बाद बाद जब बच्चा रोया नहीं तो वहां की नर्सो के द्वारा पुनर्जीवन प्रक्रिया दी गई तो बच्चे में सांस आई । बावजूद इसके वो रोया नहीं। इसके बाद बच्चे को बेहतर इलाज के लिए शिशु रोग विशेषज्ञ के पास भर्ती कराया गया जहां उसका इलाज चल रहा है और कोमल की स्थिति भी बेहतर है।

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