बेगूसराय सदर विधानसभा क्षेत्र से सिटिंग विधायक की दावेदारी तय

पोलिटिकल डेस्क : बिहार में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चुकी है। एक तरफ जहां निर्वाचन आयोग चुनाव कराने की तैयारी को अंतिम रूप दे रहा है वहीं दूसरे तरफ ज्यादातर राजनीतिक पार्टी अपने अपने गठबंधन में सीट शेयरिंग और कंडीडेट सलेक्शन में भीड़ गए है। ऐसे में “चुनाव की बात द बेगूसराय के साथ” में हम आपको जिले के सभी विधानसभा सीटों के अपडेट्स देंगे ।

पहले पहल आगाज बेगूसराय सदर विधानसभा क्षेत्र की करें तो 2015 चुनाव में तब के महागठबंधन उम्मीदवार कांग्रेस की अमिता भूषण ने बीजेपी के सीटिंग विधायक सुरेंद्र मेहता को जबरदस्त अंतर से पटखनी दी थी। कहा जाता था कि तब के चुनाव में बीजेपी के एक बरे नेता ने कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाया था हलांकि इन बातों का अफवाह गर्म रहा लेकिन इस बात की स्त्यता पांच साल बाद यानी आजतक नहीं हो पाई है। महागठबंधन में शामिल दल राजद,कांग्रेस,वामदल,रालोसपा और वीआईपी की बात करें तो यह सीट कांग्रेस कोटे में जाती हुई दिख रही है क्योंकि बेगूसराय जिला में कांग्रेस सदर क्षेत्र और बछवाड़ा सिटिंग सीट है और मटिहानी से कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अभय सिंह उर्फ सारजन सिंह ताल ठोक रहे हैं।

कांग्रेस पार्टी तीन नहीं तो दो सीट से कम पर गठबंधन में मानेगी ही नही, बछवाड़ा के विधायक स्व रामदेव राय की हाल ही में हुए मृत्यु के बाद बछवाड़ा सीट के समीकरण बदल चुके हैं तो फिलवक्त सदर और मटिहानी सीट कांग्रेस की पक्की मानी जा रही है। समीकरण के लिहाज से सदर विधायक अमिता भूषन की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है।

बेगूसराय सदर सीट पर अभी के मेयर उपेंद्र सिंह ने भी लोजपा के टिकट पर अपनी किस्मत आजमाई थी। लेकिन वे हार गए थे। स्व भोला बाबू की परंपरागत सीट रहे बेगूसराय सदर उनके नवादा सांसद बनने के बाद उपचुनाव में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष श्री कृष्ण सिंह को 2009 में विधायक का टिकट मिला था । उपचुनाव को उन्होंने जितकर वापस बीजेपी के झोली में यह सीट डाल दिया था । लगभग छह महीने के बाद हुए 2010 विसचुनाव में भाजपा पार्टी ने सुरेंद्र मेहता को टिकट देकर भेजा और वे जीत भी गए थे ।

लेकिन कहा जाता है कि भूमिहार बाहुल्य इस सीट पर सुरेंद्र मेहता के पाँचवर्षीय कार्यकाल से भूमिहार वोटर नाखुश दिख रहे थे ऐसे में जब 2015 में कांग्रेस के टिकट पर अमिता भूषण मैदान में आई तो बीजेपी में एन्टी मेहता लॉबी ने क्रॉस प्रचार किया खामियाजा यह हुआ कि एनडीए बेगूसराय में किसी भी सीट पर नहीं जीत पाया। अभी के समीकरण और माहौल बदले जरूर हैं सीट एनडीए में बीजेपी का ही होगा ये तय है। ऐसे में पार्टी सुरेंद्र मेहता को मैदान में उतारती है या नहीं ये बड़ा सवाल अभी तक बना हुआ है, सूत्र की माने तो बीजेपी के टिकट सलेक्शन कमिटी में इस बार इस सीट से भूमिहार कंडीडेट पर भी चर्चा की जायेगी।

थर्ड फ्रंट इस सीट से अभी तक दमदार नहीं दिख रहा है। वहीं सुरेंद्र मेहता को सूमो का करीबी नेता माना जाता है ऐसे मेहता की टिकट काटना सलेक्शन कमिटी के लिए आसान नहीं होने बाला है यानी कुल मिलाकर चुनाव में आने बाला समय और भी इस सीट के लिए रोमांचक होने बाला है।