“संवर्धन” कार्यक्रम जिले को कुपोषण मुक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल : डीएम

DM Begusarai

न्यूज डेस्क: जिले में छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से सम्बन्धित सूचकांकों में अपेक्षित सुधार के उद्येश्य से आज शुक्रवार जिला अधिकारी अरविंद कुमार वर्मा के नेतृत्व में कारगिल विजय सभा भवन में गंभीर कुपोषित बच्चों हेतु समुदाय आधारित कार्यक्रम “संवर्धन” के जिलास्तरीय कार्यशाला-सह-कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा यह “संवर्धन” कार्यक्रम जिले को कुपोषण मुक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम के जरिए कुपोषण में कमी लाने हेतु पूर्व से चले आ रहे संस्थागत प्रयासों के अतिरिक्त समुदाय विशेष की भूमिका का विस्तार किया गया है, जो प्रभावी क्रियान्वयन से सकारात्मक परिणाम दे सकता है।

जिले के कुल 108 कुपोषित बच्चों का समुदाय आधारित प्रबंधन किया जाएगा: आज उन्होंने बताया NFHS-4 की तुलना में NFHS-5 के अनुसार, राज्य में कुपोषित बच्चों के प्रतिशत में वृद्धि अंकित की गई है। इसी संदर्भ में जिले सहित राज्य के अन्य चार आकांक्षी जिलों में कुपोषित बच्चों का समुदाय आधारित प्रबंधन किए जाने का निर्णय लिया गया है। इसी क्रम में जिला के प्रत्येक प्रखंड में चिन्हित 06 आंगनबाड़ी केंद्रों जिले में कुल 108 के पोषक क्षेत्रों में कुपोषित बच्चों का समुदाय आधारित प्रबंधन किया जाएगा। बता दे की पीरामल फाउन्डेशन एवं यूनिसेफ के सहयोग से इस कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुपोषित बच्चों को वृद्धि निगरानी के माध्यम से पहचान कर आशा कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी सेविका द्वारा गृह आधारित देखभाल के माध्यम से कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु स्वास्थ्य एवं आईसीडीएस विभाग के संबंधित पदाधिकारियों एवं क्रमियों का क्षमतावर्द्धन प्रशिक्षण इन दोनों एजेंसियों के सहयोग से किया जाएगा।

इस कार्यक्रम के तहत लोगों को जागरूक करें: कुपोषण के संबंध में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर आमजनों में कुपोषण के कारणों, पहचान तथा उसके दुष्परिणामों के संबंध में अपेक्षा कम रुकता होती इसलि आवश्यक है कि संवर्धन कार्यक्रम के जरिए आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाओं, आशा कार्यकर्ताओं आदि को विषय आधारित प्रचार सामग्रियां उपलब्ध कराया जाए ताकि गृह भ्रमण आदि के दौरान इन सामाग्रियों के जरिए कुपोषण के संबंध में व्यापक जागरूकता का प्रसार किया जा सकें।

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