आखिर पूरा हुआ पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी का सपना,बिहार में 86 साल बाद कोसी नदी पर बना रेल पुल तैयार, जल्द दौड़ेगी ट्रेन

डेस्क : भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई जी का सपना आखिरकार पूरा हो ही गया। बिहार में वर्ष 1934 में आए भीषण भूकंप के दौरान कोसी नदी पुल पर बना रेल पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। अब कोसी पुल पर ट्रेन का परिचालन शुरू की संभावना बन गई है। कोसी नदी पर रेल पूर्व बनकर लगभग तैयार हो गया है रेलवे उत्तर बिहार के लिए दूरस्थ क्षेत्र के लोगों के 86 वर्ष पुराने इस सपना सच होने जा रहा है जल्द ही यह पुल बनकर तैयार हो जाएगा।

बीते 23 जून को इस नवनिर्मित रेल पुल पर पहली बार ट्रेन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। 1934 के भूकंप में टूट गया था पुल कोसी नदी का पश्चिम दिशा में उत्तरोत्तर विस्थापन के क्रम में सन 1934 में यह पुल ध्वस्त हो गया था एवं कोसी नदी निर्मली एवं सरायगढ़ के बीच आ गई थी, कोसी नदी की मनमानी धाराओं को नियंत्रित करने का सफल प्रयास पश्चिम और पूर्वी तटबंध निर्माण के साथ हुआ था। पूरी और पश्चिमी तटबंध पर बैराज निर्माण के साथ 1955 में आरंभ हुआ था पूर्वी और पश्चिमी छोर पर 120 किलोमीटर लंबा तटबंध 1959 में पूरा कर लिया गया और 1963 में भीमनगर बैराज का निर्माण भी पूरा कर लिया गया।

2003-2004 में शुरू हुआ था परियोजना लगभग 1.9 किलोमीटर लंबे नए कोसी महासेतु सहित 22 किलोमीटर लंबे निर्मली सरायगढ़ रेलखंड का निर्माण वर्ष 2003-2004 में शुरू हुआ था.इसके लिए 323.41 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी. 6 जून 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी इस परियोजना का शिलान्यास किया था।

कोसी के बहाव के कारण होती थी परेशानी प्रभाव का मार्ग परिवर्तित करने में खुशी का कोई जोड़ नहीं है बिहार में कोसी नदी के धाराओं का विस्थापन पिछले 100 वर्षों में लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर के दायरे में होता रहा है। कोसी नदी के दोनों किनारे को जोड़ने में यह एक बहुत बड़ी रुकावट थी पुल का निर्माण निर्मली एंव सरायगढ़ के बीच किया गया निर्मली से सरायगढ़ तक का सफर वर्तमान में दरभंगा, समस्तीपुर,खगड़िया, मानसी, सहरसा होते हुए 298 किलोमीटर का है।

निर्माण से 298 किलोमीटर की दूरी मात्र 22 किलोमीटर में सिमट जाएगी, सफर करने वाले यात्रियों को काफी सुविधा मिलेगी। गौरतलब है कि कोसी नदी संपूर्ण बिहार प्रदेश को ही नहीं बल्कि समग्र भारत और नेपाल के प्रमुख नदियों में अन्यतम मानी जाती है यह बराह क्षेत्र कुसहा तथा चतरा स्थानों से होते हुए बिहार की सीमा में सहरसा जिले के बीरपुर और भीम नगर स्थानों से प्रवेश करती हैं।