डीआईजी मनु महाराज के दौरे पर जयमंगलागढ़ में पुलिस चेक पोस्ट की हुई थी स्थापना, आज भी संसाधनविहीन

Jamangla Gadh Police Picket

मंझौल ( बेगूसराय ) : दो साल पहले 31 जनवरी 2019 को बेगूसराय के तत्कालीन प्रभारी एसपी प्राणतोष कुमार दास के द्वारा उदघाटित जयमंगला टूरिस्ट पुलिस चेक पोस्ट आज तक संसाधनविहीन होने का दंश झेल रहा है। बताते चलें कि 28 जनवरी 2019 को मुंगेर के तत्कालीन डी आई जी मनु महाराज ने अपने दौरे के क्रम में जयमंगला गढ़ में टूरिस्ट पुलिस पोस्ट बनाने की घोषणा किया था।

जिसके महज तीन दिनों के बाद आनन फानन में मंझौल ओपी के अंतर्गत जयमंगला गढ़ मन्दिर परिसर स्थित गेस्ट हाउस में टूरिस्ट चेक पोस्ट की शुरुआत की गई थी। फिलवक्त इस चेक पोस्ट पर एक चेकपोस्ट प्रभारी सहित आधा दर्जन पुलिस बल तैनात हैं। बता दे कि दो साल बीत जाने के बाद भी विभागीय स्तर से चेक पोस्ट के नाम पर गेस्ट हाउस में ठहरने रुकने भर की व्यस्थाएँ प्रदान की गई है।

इस बात से संसाधन की उपलब्धता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा है कि हजारों एकड़ में फैले कावर परिक्षेत्र में अवस्थित उक्त चेक पोस्ट पर आधे दर्जन सशस्त्र बलों की यातायात सुविधा महज एक बाइक पर टिकी हुई है। मिली जानकारी के अनुसार उद्घाटन के बाद विभागीय स्तर से इसकी मजबूती बढाने को लेकर नगण्य पहल हुआ है।

पर्यटकों की सुरक्षा के लिहाज से पुलिस चेकपोस्ट की हुई थी स्थापना : ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल जयमंगला गढ़ मंदिर एवं कावर झील में आने बाले पर्यटकों को सुरक्षा के लिहाज से एक पुलिस पदाधिकारी के साथ एक हवलदार एवं 5 जवान की तैनाती की गयी थी। इसी क्रम में मंदिर परिसर में ही जर्जर हो रहे गेस्ट हाउस में जवानों के रहने के लिए अस्थाई तौर पर की व्यवस्था किया गया था। अब तो उक्त भवन में के छज्जे और दीवार में दरारें भी उभरने लगी है। जो कि बाहर से ही खतरा का परिचायक है। परन्तु आज भी उसी व्यवस्था में पुलिस चेक चल रहा है।

बताते चलें कि बेगूसराय जिला मुख्यालय से करीब 22 किमी की दूरी पर स्थित जयमंगला गढ़ मंदिर शक्तिपीठ व हिन्दू धर्मावलंबियों का प्राकृतिक धरोहर है। यह बिहार के एकमात्र रामसर साइट कावर झील एशिया का सबसे बड़ा पक्षी विहार अभयारण्य है। जहां घूमने के लिए पर्यटक आते हैं एवं माता से आशीर्वाद प्राप्त कर मंगल कामना करते हैं। बताते चलें कि कलांतर में यहां पुलिस पिकेट की स्थापना की गई थी जिसके बाद पिकेट हटा लिया गया था। जिसके बाद पुनः 2019 में पिकेट की स्थापना हुई।

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