पंचायत चुनाव : बेगूसराय के भगवानपुर प्रखंड में आज नामांकन पर्चा दाखिल करने का अंतिम दिन

Parcha

न्यूज डेस्क : बेगूसराय के भगवानपुर प्रखण्ड में पंचायत चुनाव दूसरे चरण में आयोजित होंगे । इसको लेकर आज अंतिम दिन सभी उम्मीदवार पर्चा दाखिल कर सकेंगे । भगवानपुर प्रखण्ड में चुनावी तापमान बढ़ती ही जा रही है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में भगवानपुर प्रखंड में चुनाव होना है । जिसके लिए आज नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है।आज विगत दिनों से ज्यादा भीड़ की संभावना है तथा सोमवार के साथ सप्तमी दिन भी है जो शुभ है। सभी बचे हुए प्रत्याशी आज शुभ मुहूर्त में नामांकन पर्चा दाखिल करने के उत्सुक हैं। बताते चलें कि जिले के भगवानपुर प्रखण्ड में चुनावी चौसर पर राजनीतिक दल के भी लोग दाव पेंच आजमाने में जुटे हुए हैं।

पंचायत चुनाव को लेकर पंचायतों में आम लोगों के साथ राजनीतिक दलों की सक्रियता भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर से बढ़ी हुई है। भले ही पंचायत का चुनाव में दलीय आधार पर चुनाव चिह्न का आवंटन नहीं होगा , पर चुनाव में पार्टी कैडर की गोलबंदी खूब हो रही है। जिले में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अपने समर्थकों को मैदान में उतारने की कवायद शुरू कर दिए हैं। हालांकि यह सारा काम पर्दे के पीछे चल रहा है। पांच साल बाद पंचायत की सरकार के लिए शुरू हुए महासमर में मुखिया, सरपंच, पंच, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य से लेकर जिला परिषद पद के लिए अभ्यर्थियों जो हर समीकरण पर फिट बैठने वाले हों, वैसे उम्मीदवारों की खोज जोर शोर से जारी है। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी सभी संभावित प्रत्याशी इसको लेकर तैयार होकर अपनी बारी की इंतजार में बैठे हैं। क्षेत्र में दल विशेष के कई दावेदार पंचायत चुनाव में भाग आजमाने को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

पंचायत में दलीय निष्ठा , गुटबंदी चुनाव लड़ने और एक-दूसरे पद से सहमति बनाने का भी प्रयास जारी दिख रहा है। ताकि मुखिया और सरपंच के बीच तालमेल बनाकर विकास की पथ पर गांव अग्रसर हो सके। जहां तालमेल की स्थिति नहीं है वहां दोनों पदों के लिए भावी उम्मीदवारों की तलाश भी की हो रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अपने खास समर्थकों पर सहमति बनाने का प्रयास पर्दे के पीछे से करने में जुटे हुए हैं। मिली जानकारी के अनुसार पंचायत चुनाव में एक ही क्षेत्र से एक ही दल विशेष के कई प्रत्याशी चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। जिससे चुनावी महासंग्राम में दलीय प्रतिबद्धता टूटने के भी आसार व्याप्त हैं। बीते दिनों सरकार द्वारा इस बार सरपंचों को विकास योजनाओं में अधिकार दिए जाने की घोषणा होने के साथ ही इस पद के लिए भी मुखिया की तरह दावेदारों की संख्या चुनावी चौसर में बढ़ने लगी है।

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