मशीन द्वारा धान की होगी सीधी बुआई, कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को दिया गया ऑनलाइन प्रशिक्षण

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न्यूज डेस्क : बेगूसराय जिले के कृषि विज्ञान केन्द्र खोदावंदपुर के वैज्ञानिकों के द्वारा शनिवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.प्रशिक्षण में वैज्ञानिकों ने ऑनलाइन के माध्यम से किसानों को मशीन द्वारा धान की सीधी बुआई पर विस्तार से जानकारी दी.प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से लगभग 50 किसानों, अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया.इस मौके पर खोदावंदपुर केविके के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ रामपाल, वैज्ञानिक डॉ मुकेश कुमार, शीशा के वैज्ञानिक डॉ अनुराग कुमार, डॉ अनिल झा, निदेशक डॉ अजय कुमार सहित अन्य लोगों ने धान की सीधी बुआई के महत्व व इसमें आनेवाले खर्च एवं इसके फायदे के बारे में विस्तृत चर्चा की गयी.

केन्द्र प्रभारी डॉ रामपाल ने कहा कि बुआई से पूर्व धान के बीजों का उपचार अति आवश्यक है. सबसे पहले बीज को पानी में भीगोकर उसमें से खराब बीज को निकाल दें, इसके बाद एक किलोग्राम बीज की मात्रा के लिए 0.2 ग्राम सटेप्टो साईकलीन के साथ दो ग्राम कार्बेंडाजिम मिलाकर बीज को दो घंटे छाया में सुखाकर मशीन के द्वारा सीधी बुआई करने की बात कहीं.वहीं वैज्ञानिक डॉ मुकेश कुमार ने कहा कि धान की परंपरागत बिजाई की तुलना में डीएसआर में कम पानी खर्च होता है. साथ ही ईंधन, समय और खेती की लागत के नजरिए से भी डीएसआर फायदेमंद हैं.डीएसआर तकनीक पानी के किफायती उपयोग तथा मिट्टी का समुचित ध्यान रखने की प्रेरणा देती है.उन्होंने कहा कि जीवाश्म ईंधन जैसे डीजल, पेट्रोल का अधिक उपयोग पर्यावरण को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है.डीएसआर में ऐसे ईंधन का उपयोग परंपरागत बिजाई की तुलना में कम होता है.जमीन एवं जल- संसाधन संरक्षण के साथ-साथ मजदूरी व ऊर्जा की बचत होगी.बिजाई जून के दूसरे या तीसरे सप्ताह में करना चाहिए.

सीनेट के वैज्ञानिक डॉ अनुराग कुमार एवं डॉ अनिल झा ने भी अपने सुझाव से किसानों को अवगत कराया.डॉ अनुराग ने किसानों को खेतों को दो से तीन बार जुताई कर तैयार करें.सीडड्रिल से 3-5 सेमी गहराई पर बिजाई करें.खेतों की तैयारी एवं बिजाई शाम को करें.ड्रिल से 2-3 सेमी गहराई पर बिजाई करें. बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई करें. चार- पांच दिन बाद फिर सींचे.बिजाई के तुरंत बाद व सूखी बिजाई में 0-3 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1.3 लीटर प्रति एकड़ स्प्रे करें.वैज्ञानिकों के अनुसार सीधी बिजाई में रोपाई वाली धान की बजाए ज्यादा खरपतवार आते हैं और वे भिन्न भी होते हैं.दोनों अवस्था में 15 से 25 दिन बाद बिस्पायरीबैक 100 एमएल प्रति एकड़ स्प्रे करें.वहीं छौड़ाही प्रखंड के किसान अनीश कुमार ने अपने द्वारा पूर्व में किये गये धान की सीधी बुआई के फायदे को बताया. तथा वे पूर्व के वर्षों में भागलपुर कतरनी धान की खेती की थी और भागलपुर कतरनी के खुशबू को बेगूसराय में भी फैलाया था.

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