बिहार सरकार की घोषणा के एक साल बाद भी नहीं शुरू हो सका मंझौल रजिस्ट्री ऑफिस, विभागीय उदासीनता से जनता परेशान

न्यूज डेस्क : मंझौल में एक वर्ष बाद भी नहीं खुला रजिस्ट्री कार्यालय। बिहार सरकार के मंत्रिमंडल के निर्णय और अधिसूचना जारी होने के आज एक वर्ष बीत गए। रजिस्ट्री कार्यालय के मकान पर भी लाखों खर्च हो गए। रजिस्ट्री कार्यालय के लिए रजिस्टार और स्टाफ भी लगभग नियुक्त हो वेतन पा रहे हैं। पिछले छह महीने से आज शुरू होगा ,आज शुरू होगा का भेड़िया डर की तरह चिललाहट हो रही है। जिले के अधिकारी, क्षेत्र के विधायक, क्षेत्र के सांसद और जिले तथा क्षेत्र के भारी भारी नेता बिहार के अधिकारियों के निर्णय को लागू कराने की दीघसुत्री व्यवस्था पर मौन हैं।

मंझौल( जिला बेगूसराय) में खुलेगा रजिस्ट्री कार्यालय बिहार राज्य मंत्रिमंडल की 18-9-2020 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंझौल में रजिस्ट्री कार्यालय खोलने की अनुमति दी गई। पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री रामजीवन सिंह ने बिहार के निबंधन मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव से मिलकर इस बाबत प्रस्ताव दिया था। मंत्री ने संज्ञान लेते हुए गुरुवार 18 सितंबर 2020 को मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव लाया। जिसे स्वीकृति दी गयी। बैठक के प्रस्ताव तीन जो मद्य निषेध निबंधन विभाग के द्वारा दिया गया था। इसमें कहा गया कि निबंधन विभाग के अधीन बेगूसराय जिले के मंझौल में एक अवर निबंधन कार्यालय खोलने की स्वीकृति दी जाती है।

जिसमें बखरी निबंधन कार्यालय से चेरियाबरियारपुर,खोदाबंदपुर और छौडाही ब्लाक को अलग कर नए अवर निबंधन कार्यालय मंझौल से जोड़ने की अनुमति दी गयी है। इसके लिए एक अवर निबंधक,एक कार्यालय सहायक और एक रात्रि प्रहरी के पदस्थापना की अनुमति दी जाती है। इसके लिए 1479732 रूपये का बजट भी दिया गया है। मंझौल के लोगों की यह पुरानी मांग थी। वर्ष 1991 में रामजीवन सिंह द्वारा ही मंझौल को अनुमंडल का दर्जा दिलवाया गया था और तब से ही यहां रजिस्ट्री आफिस खोलने की मांग की जा रही थी। मंझौल में रजिस्ट्री आफिस खोलने की घोषणा पर क्षेत्रीय लोगों ने खुशी जाहिर की थी ।