महाशिवरात्रि पर पूजा के शुभ मुहूर्त व पौराणिक कथा , जानिये क्या है

न्यूज डेस्क / धर्म कर्म : प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी शिवरात्रि कही जाती है परन्तु फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी महा शिवरात्रि कही गयी जाती है। शिवपुराण की कथा के अनुसार महा शिवरात्रि तिथि को ही देवाधिदेव महादेव एवं शक्ति स्वरूपा देवी गौरी के पावन परिणय उत्सव का मुहूर्त फागुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि मानी गई है। वैसे तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चतुर्थी नवमी एवं चतुर्दशी तिथि रिक्ता तिथि कही गई है जो कि किसी शुभ एवं संस्कार कार्य के लिए वर्जित माना गया है लेकिन यह विहंगम संयोग है कि चतुर्दशी तिथि को ही शिवा और शक्ति के मिलन पावन पर्व उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष अंग्रेजी तारीख के अनुसार 11 मार्च को महाशिवरात्रि व्रत एवं गौरी शंकर विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।

यह भी कथा है मान्यता में एक अन्य कथा के अनुसार झारखंड स्थित श्री रावणेश्वर बैद्यनाथ प्रतिष्ठा दिवस भी शिवरात्रि ही माना गया है, इस कारण महाशिवरात्रि की तिथि शिव उपासना शिव अर्चन के लिए विशिष्ट रूप से अपना महत्व रखता है।महाशिवरात्रि के दिन शिव वास योग नहीं होने के बावजूद शिव अर्चन हजार अश्वमेध यज्ञ के फल को देने वाला होता है।इस दिन विशेष रुप से गाय का दूध दही घी मधु शक्कर से पंचामृत का निर्माण करें एवं उस पंचामृत से शिव का पंचाक्षर मंत्र के साथ पंचाक्षर स्तोत्र पाठ करते हुए शिव का अर्चन पूजन एवं अभिषेक करना चाहिए। शिव अर्चन के लिए ओम नमः शिवाय या पंचाक्षर मंत्र कहा गया है इस पंचाक्षर मंत्र से पूजन एवं इसका जप विशेष लाभकारी है। सूर्यास्त के पश्चात शिव शंकर विवाह के निम्मित श्रृंगार पूजन करना चाहिए एवं यथासंभव ईशान कोण की तरफ मुख करके शिव के पंचाक्षर मंत्र का जप करना चाहिए। ब्रह्माद्री खंड के अनुसार उपवास के साथ रात्रि जागरण सभी सुर असुर के लिए उत्तम फल दायी यिग रहता है। शिवोपासना के लिए मनुष्य को सर्वप्रथम भस्म का त्रिपुंडतीलक,गले मे रुद्राक्ष और वेलपत्र का होना अतिआवश्यक माना गया है। बिनाभस्म त्रिपुण्डन बिनु रुद्राक्ष मालया विना वेलपत्रेण शिवर्चा कदा भवेत। अर्थात बिना भस्म त्रिपुण्ड,बिना रुद्राक्ष माला और बिना वेलपत्र का शिव पूजन अर्चन कैसे हो सकता है।

महाशिवरात्रि पर पूजन के शुभ मुहूर्त 11 मार्च 2021 को शाम 7:28 तक प्रदोष काल बीतेगा प्रदोष काल में महादेव का पूजन अनंत पुण्यदायीएवं शीघ्र ही मन के सभी मनोरथ हों को पूर्ण करने वाला होता है इसलिए 11 मार्च 5:52 से 7:28 तक सायं काल जोकि प्रदोष काल है सभी शिव भक्तों के लिए पुण्यदायी एवं मनोरथ को पूर्ण करने वाला समय बीतेगा।

आचार्य अविनाश शास्त्री
फलित ज्योतिषाचार्य
माध्यमिक शिक्षक

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