पुण्य तिथि पर जानिये मटिहानी के पूर्व विधायक स्व प्रमोद शर्मा के शख्सियत के बारे में , वरिष्ठ पत्रकार कि कलम से

न्यूज डेस्क, बेगूसराय : बेगूसराय जनपद ने अनेक सख्शियतों को जन्म दिया है। इनमें से एक रहे हैं पूर्व विधायक प्रमोद कुमार शर्मा। श्री शर्मा से मेरा परिचय तब हुआ जब 1990 में विधानसभा का चुनाव हार चुके थे और बेगूसराय प्रेस क्लब में अक्सर आते-जाते थे। बाद में वे 1995 में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष बन गए और पूरे जिले का दौरा करने लगे।

सहृदय श्री शर्मा जी मेरी निकटता तभी बढ़ी। मुझे एक वाकया याद आता है 1997 में । गढ़पुरा प्रखंड के सोनमा गांव में उस समय के एक कुख्यात अपराधी करेंटवा ने एक कांग्रेसी कार्यकर्ता बौएलाल साह की हत्या कर दी। गांव और इलाके में उसके डर से कोई बोलता नहीं था। उसके घरवाले दहशत में थे। शर्मा जी वहां गए और उसकी श्रद्धांजलि सभा करवाईं। बेगूसराय से सोनमा जाने के क्रम में मंझौल में मेरे घर पर आए और मुझसे कहा – चलिए आज करेंटवा को करंट लगाते हैं उस गांव के लोग डरे हैं और हमको तो मटिहानी क्षेत्र में करेंटवा के बाप ऐसे ऐसे से कितने मुलाकात हो चुकी है। सोनमा में उन्होंने मंच से करेंटवा को सीधे तौर पर ललकारते हुए कहा अपराध और अपराधी को कांग्रेस पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी।

उनकी ललकार ने स्थानीय और उपस्थित कांग्रेसियों में साहस भर दिया।
सरल हृदय के श्री शर्मा 1980और 1985 में दो बार मटिहानी क्षेत्र से विधायक रहे। यह समय मटिहानी के इतिहास में दुर्धर्ष था। कामदेव सिंह मारे जा चुके थे। सीपीआई और कांग्रेस आई का टकराव चरम पर था। रोज-ब-रोज हत्या होती थी। गांव गांव में गिरोहबंदी थी। प्रमोद शर्मा ने सीपीआई से टकराव कै बीच सिर्फ सीट ही नहीं जीती क्षेत्र में अमन-चैन बनाने और लोगों के बीच भाईचारा कायम करवाने में सफलता पारी।वे जनता के एमएलए थे और यह गुण चुनाव हारने के बाद भी बना रहा। उसके बाद वे कभी एमएलए नही बने, लेकिन, जनता के काम को लेकर हमेशा सक्रिय रहे।

चाहे वे कांग्रेस में रहे या बाद के दिनों में जनता दल यू में। हमेशा जनता के बीच रहे। जीवन के अंतिम दिनों में भी वे जिले भर में संपरकियों के न्यौता में जाने से नहीं चूकते। लोगों से मिलना और उनके दुःख दर्द में शामिल रहना उनकी खूबी बनी रही। पत्रकारिता के अग्रज श्यामा चरण मिश्र के गांव में उनका ससुराल था और दोनों में जमकर हंसी-मजाक चला करता था। शर्मा जी ठहाके लगाने नहीं भूलते। पत्रकारों का उनका नजर में सम्मान था। 1990 के चुनाव में जिले भर के पत्रकारों ने उनके विरुद्ध राजेन्द्र राजन की मदद की। लेकिन,कभी मनोमालिन्य नहीं रखा। आज उनकी पुण्यतिथि है । एकबार फिर नमन।