जानिए साल 2021 का मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त और भीष्म पितामह से जुड़ी पैराणिक कथा

धर्म कर्म, डेस्क : 12 राशियों में सूर्य भ्रमण करते हुए एक सौर वर्ष पूर्ण करते हैं सूर्य का राशि परिवर्तन अर्थात जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो वह संक्रांति कहा जाता है। सूर्य का धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने के दिन को ही मकर संक्रांति कहा गया है। शास्त्रों के अनुसार मकर राशि में प्रवेश करने के पश्चात सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और यह समय शुभ मांगलिक कार्य एवं षोडश संस्कार के लिए उत्तम होता है अतः हम ऐसा कह सकते हैं कि सूर्य के उत्तरायण होने पर मकर राशि में सूर्य के प्रवेश होने पर समय शुद्घ माना जाता है। महर्षि वाराह्मीहिर के बृहद संहिता के अनुसार “सम्प्रतमयनम सवीतुः कर्कटकाध्यम मृगाडीतश्चान्यत” अर्थात जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करते हैं तो दक्षिणायन एवं जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब सूर्य उत्तरायण माने गए हैं।

क्या है पौराणिक कथा महाभारत कथा के अनुसार भीष्म पितामह वाण की शय्या पर तब तक सोए रहे जब तक कि सूर्य उत्तरायण नहीं हुआ था और मकर संक्रांति के दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर भीष्म पितामह अपनी इच्छा मृत्यु के अनुसार मृत्यु को वरण किया।

दिन के 2 बजे शुभ मुहूर्त इस वर्ष सूर्य धनु राशि से मकर राशि में दिनांक 14 जनवरी गुरुवार को प्रवेश अट्ठारह दंड 21 पला अर्थात दिन के 2:05 में प्रवेश करेंगे जिसके अनुसार संक्रांति का पुण्य काल दिन के 2:05 के बाद बीतेगा।शास्त्रों के अनुसार इस संक्रांति को सौम्यायन संक्रांति कही गई है।

“मुहूर्त चिंतामणि” के अनुसार “मंदाकिनी स्थिर गुरौ सुखेयेच्चमंदा विप्रश्छ” अर्थात बृहस्पतिवार के दिन सूर्य की संक्रांति होने पर शिक्षा,अध्ययन अध्यापन,सचिव,लेखन,नीति, निर्धारक आदि क्षेत्र से जुड़े हुए व्यक्तियों के लिए तथा मंदिर धर्माचरण,कर्मकांड आदि कर्मों को संपादित कराने वाले लोगों के लिए लाभकारी रहेगा।

मकर संक्रांति को क्यों कहते हैं तिलासंक्रांति मकर संक्रांति को तिला संक्रांति भी कहते हैं क्योंकि मकर राशि का स्वामी शनि होता है और नैसर्गिक मैत्री चक्र के अनुसार सूर्य एवं शनि परस्पर शत्रु हैं अतः सूर्य अपने शत्रु की राशि में गमन करते हैं जिस कारण लोगों के लिए तिल कम्बल का दान तिल का भोजन,आदि लाभकारी रहता है।

गुरुवार को भी खाएंगे खिचड़ी और तिल चावल : संक्रांति पर्व में मकर संक्रांति का महत्व होता है दिन का नहीं इसलिए वृहस्पतिवार को पीले खिचड़ी भोग लगाएं और तिल चावल कुलदेवता पर अर्पित करके बुजुर्गों के हाथ से ग्रहण करते हुए खाए।

शुभमुहूर्त मकर संक्रांति का स्नान पूजन सबेरे से ही आरंभ है किंतु तिल गुड़ खिचड़ी भोग दोपहर दो बजकर पांच मिनट के बाद ही उत्तम होगा।

आचार्य अविनाश शास्त्री
ज्योतिषाचार्य
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