बसंत के आगमन से आम व लीची के पेड़ में आ रहे हैं मंजर, किसानों के लिए बाग बगीचे की देखभाल जरूरी

Litchi

न्यूज डेस्क , बेगूसराय : जिले के बाग बगीचे के आम एवं लीची के पेड़ मंजरों से लदने लगे हैं। कई पेड़ में गोटा यानी छोटे-छोटे दाने के बराबर फल भी बनने प्रारंभ हो गए हैं। यह समय बाग-बगीचों के लगातार देखभाल का है। थोड़ी सी लापरवाही साल भर की मेहनत को बर्बाद कर सकती है। बगीचा प्रबंधन विषेशज्ञ अनीस कुमार बताते हैं कि आम में मंजर आने के बाद बाग का प्रबन्धन आम की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए आवश्यक है। मंजर आने के बाद बाग का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जाय। जिससे आम लीची अमरूद आदि के पेड़ बंपर फल उत्पादन के लिए तैयार हो सकेंगे।

बाग बगीचे का प्रबन्धन : जब मंजर निकल रहा हो उस समय इमिडाक्लोरप्रिड (17.08 एस0एल0) एक मिलीलीटर दवा प्रति दो लीटर पानी में और घुलनशील गंधक चूर्ण, फफूंदनाशक दवा (80 डब्लू पी0) दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से आम का मधुवा कीट एवं चूर्णिल आसिता रोग की उग्रता में कमी आती है। रोगग्रस्त मंजर को तोड़कर बाग से बाहर ले जाकर जला दे या जमीन में गाड़ दें। पेड़ के मुख्य तने पर बोर्डाे पेस्ट (एक किग्रा चूना + एक किग्रा तुतिया + 10 लीटर पानी) से पुताई करनी चाहिए। इस अवस्था में सिंचाई नही करें नही तो फल झड़ने की सम्भावना बढ़ जाती है।

मंजर के अच्छी प्रकार से खिल जाने के बाद से लेकर फल के मटर के दाने के बराबर होने की अवस्था के मध्य किसी भी प्रकार का कोई भी कृषि रसायन का प्रयोग नहीं करें। अन्यथा फूल के कोमल हिस्से घावग्रस्त हो जाते हैं जिससे फल बनने की प्रक्रिया बुरी तरह से प्रभावित होती है। मटर के दाने के बराबर फल हो जाने के बाद इमिडाक्लोरप्रीड (17.08 एस0एल0) एक मिली दवा प्रति दो लीटर पानी में और हैक्साकोनाजोल एक ग्राम प्रति दो लीटर पानी या डाइनोकैप (46 ई0सी0) एक मिली दवा प्रति एक लीटर पानी में घोलकर छिड़कने से मधुवा एवं चूर्णिल आसिता की उग्रता में कमी आती है।

जानिए कृषि वैज्ञानिक क्या कहते हैं ? कृषि वैज्ञानिक डॉ रामकृपालु सिंह बताते हैं की प्लेनोफिक्स नामक दवा एक मिली प्रति तीन लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से फल के गिरने में कमी आती है। इस अवस्था में हल्की सिंचाई शुरू कर दें जिससे बाग की मिट्टी में नमी बनी रहे। लेकिन इस बात का ध्यान देना चाहिए कि पेड़ के आस पास जलजमाव न हो। उन्होंने बताया कि मार्बल अवस्था मे सूक्ष्मपोषक तत्व जिसमें घुलनशील बोरान की मात्रा ज्यादा हो प्रति दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से फल के झड़ने में कमी आती है एवं फल गुणवत्ता युक्त होते है।इस समय बाग में हल्की-हल्की सिंचाई करके मिट्टी को हमेशा नम बनाये रखना चाहिए इससे फल की बढवार अच्छी होती है। बाग को साफ सुथरा रखना चाहिए। डाइक्लोरोवास प्रति डेढ़ मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर अच्छी तरह से छिड़काव करना चाहिए। इसी घोल से मुख्य तने का भी छिड़काव करना चाहिए। ऐसा करने से आम के फल छेदक कीट की उग्रता में कमी आती है।

नीम किसी से कम नहीं : अनीस कुमार बताते हैं कि प्राकृतिक कीटनाशक नीम से कई तरह की कीटनाशक दवा उपलब्ध है। इस दवा के छिड़काव से बगीचे से दुश्मन कीट मर जाते हैं। वहीं दोस्त कीट पतंग को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। उन्होंने बताया कि नीम युक्त दवा नहीं मिलने पर नीम के पांच किलो पत्ते को 50 लीटर पानी में 24 घंटे तक फुलाने के बाद छानकर छिड़काव करने से भी रासायनिक कीटनाशक दवा जितना हीं फायदा मिलता है।

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