गृह जिला बेगूसराय पहुंचे आईपीएस विकास वैभव ने कहा – स्वामी जी ने कहा था संघर्ष जितना मुश्किल होगा जीत उतनी ही शानदार होगी

न्यूज डेस्क : किसी भी समाज और राष्ट्र के लिए युवावस्था बहुत महत्वपूर्ण होता है। स्वामी विवेकानंद की कल्पना में भी सबसे बड़ी भूमिका युवाओं की थी। यह अवस्था चिंतन के लिए सबसे सकारात्मक होता है। यह बातें गृह विभाग बिहार के विशेष सचिव विकास वैभव ने शनिवार को बेगूसराय में युवाओं को संबोधित करते हुए कही। वे जिला मुख्यालय के प्रोफेसर कॉलोनी स्थित एक परिसर में स्वामी विवेकानंद विचार मंच द्वारा आयोजित ‘राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ विषयक संगोष्ठी को सम्बोधित किया ।

मोटिवेशनल स्पीच देकर प्रेरित करने वाले चर्चित आईपीएस विकास वैभव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था संघर्ष जितना मुश्किल होगा जीत उतनी ही शानदार होगी तथा खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है। स्वामी जी के जीवन को देखें, पढ़ें और सुने तो परिवार, समाज और देश के चिंतन तथा प्रेरणा का मूल उक्त दो बातों में है। स्वामी विवेकानंद की बातों में निराशा में आशा का भाव होता था। वह भारतीय चिंतन और साहित्य और संस्कृति की सच्चाई और पीड़ा बयां करते थे। स्वामी जी ने आलोचना के बाद भी कभी हार नहीं मानी, निराश नहीं हुए। हमेशा धर्म प्राचीन चिंतन को स्थापित कर युवाओं का विश्वास जगाया।

आजकल के युवाओं के मन में गलत रास्तों का विचार स्थान बना रहा है, इसके लिए बचे समय का सदुपयोग करना होगा। जीवन की यही सार्थकता है और इसी से युवाओं के मन में निराशा का भाव जगने पर रोक लगेगी। सृष्टि की सारी शक्तियां युवाओं में है, सिर्फ आंख से पट्टी हटाना है। पूरे जीवन का दर्शन और चिंतन उपनिषद में है, जो पूर्ण था, वह पूर्ण है और पूर्ण में ही विलीन हो जाता है। आत्मा परमात्मा का ही अंश है, परमात्मा की शक्ति असीम होती है इसे समझना होगा और चिंतन मनन के पूर्णता की ओर लक्ष्य करना होगा। लक्ष्य पाने के लिए याचना नहीं, विचार चिंतन और पुरुषार्थ की आवश्यकता है।

बिहार की चर्चा करते हुए विकास वैभव ने कहा कि बिहार का भविष्य उज्जवल था, उज्जवल है और उज्जवल रहेगा। बिहार ज्ञान, शौर्य तथा उद्यमिता की धरती है। शून्य का आविष्कार इसी बिहार में हुआ, यहीं चाणक्य ने असंभव को संभव बना दिया। बिहार भारत ही नहीं, दुनिया भर के लिए शिक्षा और प्रौद्योगिकी की धरती रही। इसने पूरे देश दुनिया को नेतृत्व दिया। दुनिया भर के लोग यहां शिक्षा ग्रहण करने आते थे। बिहार में जितने भी जनपद थे सभी अपने क्षेत्र में पूर्ण थे। मिथिला को ज्ञान का भंडार कहा जाता रहा है। उत्तर में हिमालय, दक्षिण में गंगा, पूर्व में कौशाकी और पश्चिम में गंडकी से घिरा यह मिथिला क्षेत्र विद्या का प्राचीन क्षेत्र रहा है, इसकी चर्चा वेदों उपनिषदों में, कई ग्रंथों में है।