गंगा, बूढ़ी गंडक, बलान आदि नदियों के जलस्तर में बढोत्तरी, प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य चलाने का डीएम ने दिया निर्देश

DM BGS

न्यूज डेस्क : जिले में गंगा नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। लगातार बढ़ते जलस्तर से शाम्हो, मटिहानी, बलिया, बरौनी, बछवारा सहित विभिन्न इलाकों में बाढ़ का पानी फैल चुका है। इससे आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं सभी आवश्यक तैयारियों को लेकर आज सोमवार को जिला पदाधिकारी अरविंद कुमार वर्मा के नेतृत्व में जिले के सभी अनुमंडल पदाधिकारियों (SDO) एवं अंचलाधिकारियों (CO) के साथ वर्चुअल माध्यम से समीक्षा की गई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सर्वप्रथम जिले में प्रभावित होने वाली सभी नदियां गंगा, बूढ़ी गंडक, बलान आदि नदियों के जलस्तर की स्थिति के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

इसी क्रम में कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण द्वारा बताया गया कि आज सोमवार को सुबह के प्रतिवेदन के अनुसार, हाथीदह में गंगा नदी का जलस्तर 42.60 मीटर है, जो कि खतरे के निशान से 84 सेंटीमीटर अधिक है। गंगा नदी के जल स्तर के संबंध में यह भी बताया गया कि इलाहाबाद एवं बक्सर में जलस्तर में गिरावट, वाराणसी में स्थिर है। जबकि, पटना एवं हाथीदह में जलस्तर में वृद्धि हो रही है। कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, रोसड़ा द्वारा बताया गया कि बूढी नदी के जलस्तर में वृद्धि का एक कारण गंगा नदी का बैकवाटर भी हो सकता है। तथा ऐसी संभावना है कि अगले 3-4 दिनों तक गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि के उपरांत उसमें कमी आने लगेगी।

इसी क्रम में जिला अधिकारी अरविंद कुमार वर्मा ने गंगा एवं बूढ़ी गंडक नदियों से संबंधित प्रखंडों के अंचलाधिकारियों (CO) को ध्यान में रहते हुए अपने-अपने क्षेत्र में नदी जलस्तर में वृद्धि होने से प्रभावित हुए क्षेत्रों का जायजा लेते हुए आवश्यकतानुसार बचाव से संबंधित कार्य प्रारंभ करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने बताया वर्ष 2019 के रिकार्ड को ध्यान में रखा जाए तो हाथीदह में जलस्तर के 42.65- 42.70 मीटर या अधिक होने पर प्रभावित अंचलों के लो-एरिया के घरों में पानी का प्रवेश संभव है। अतः सभी अंचलाधिकारी एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी बाढ़ की स्थितियों की समीक्षा करते हुए बाढ़ आपदा प्रबंधन मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में नावों के परिचालन की स्थिति के अनुरूप आवश्यक तैयारियां तथा कम्यूनिटी किचन चलाए जाने की आवश्यकताओं का भी आकलन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसी दौरान उन्होंने सभी अचलाधिकारियों को योग्य छूटे हुए नावों को भी सूचीबद्ध करते हुए अविलंब उसका निबंधन तथा एकरारनामा की प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्देश दिया। उन्होंने बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए बूढ़ी गंडक एवं बलान नदी से संबंधित अंचलों के अंचलाधिकारियों एवं अनुमंडल पदाधिकारियों को भी तटबंधों की सतत निगरानी का निर्देश दिया।

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