शहीद की समृति में आयोजित कार्यक्रम में बेटे की तस्वीर देख फफक कर रो परी माँ

Sahid Amresh

बेगूसराय ( घनश्याम देव ) : भारत माता के लिए शहादत देने बाले सपुत की माता ने अपने बेटे की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में बेटे की प्रतिमा देखी तो उससे लिपटकर फफक कर रो पड़ी। उस वक्त बेगूसराय के मंझौल शताब्दी मैदान में मौजूद सभी लोगों की आँखे नम व सिर फक्र से ऊंचा हो रहा था । मौका था मंझौल में आयोजित शहीद अमरेश स्मृति वॉलीबॉल टूर्नामेंट के उद्घाटन समारोह का।

साल 2018 के मार्च महीने में छतीसगढ़ में नक्सली द्वारा आईडी ब्लास्ट में शहीद हुए मंझौल पंचायत एक के निवासी उमेश सिंह के पुत्र अमरेश कुमार की शहादत स्मृति में मंझौल के युवा हर साल विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। इस वर्ष भी मंझौल के शताब्दी मैदान में तीन दिवसीय बॉलीवाल टूर्नामेंट का उद्घाटन शुक्रवार को हुआ ।

पिता का सीना गर्व से रहता है ऊंचा , माँ की ममता देख हुई आंखे नम : शहीद होने के कुछ दिनों पहले ही उनका प्रमोशन होने बाली खबर मिली थी। जिस बात की चर्चा उन्होंने अपनी माँ के साथ भी किया था । वे मंझौल के आरसीएस कॉलेज से पढ़ाई किये थे । अमरेश कुमार में साल 2012 में सेना की नौकरी जॉइन की थी । वे मध्यमवर्गीय परिवार से थे । अपने एक बहन व दो भाई में सबसे बड़े थे। उनके पिता उमेश सिंह मंझौल में ही करीब 32 वर्षों से अखबार के हॉकर का काम करते हैं। जब बेटे के सेना में नौकरी होने की खबर मिली थी तब भी अखबार का काम निरतंर जारी रखा और बेटे की शहादत के बाद भी निरंतर कर्मयोगी की भांति लगे है। शहीद का पिता होने की गर्व इनके चेहरे पर साफ झलकती है। परंतु माँ की ममता देख शुक्रवार को इनकी आंखे भी नम हो गयी थी।

साल 2018 के मार्च महीने में शहीद हुए था मंझौल का लाल अमरेश : साल 2018 के मार्च महीने के सात तारीख को छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के संवेदनशील नक्सल प्रभावित जोन में बेगूसराय जिले के मंझौल पंचायत-एक निवासी उमेश सिंह के पुत्र सीमा सुरक्षा बल के आरक्षी पद पर सेवारत अमरेश कुमार नक्सलियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। अमरेश कुमार सीमा सुरक्षा बल 134 बटालियन के आरक्षी पद पर कार्यरत थे।

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