बेगूसराय के सातो विधानसभा सीट का एक्सकलुसिव अपडेट, आमने-सामने और त्रिकोणीय मुकाबले के बन रहे हैं आसार

पोलिटिकल डेस्क : चिराग के लोजपा ने बेगूसराय के सियासी समीकरण का तहस-नहस छोरा दिया है। बेगूसराय में चुनावी गर्माहट अब टॉप पर पहुंच चुका है। इसके साथ ही बेगूसराय की जनता 3 नवंबर को मतदान करने के लिए अब मूड बनाने लगी है जनता यह तय करने लगी है कि वह इस बार अपना वोट किस प्रत्याशी को देगी। बेगूसराय में 7 विधानसभा सीट है जिसमें से 1 सीट बखरी विधानसभा सीट सुरक्षित सीट है। उसके अलावा साहेबपुरकमाल, मटिहानी, तेघरा, बछवारा, बेगूसराय सदर और चेरिया बरियारपुर विधानसभा सीट है। अब सभी सीटों के बारे में अलग-अलग राजनीतिक समीकरण समझते हैं।

पहला सीट बखरी विधानसभा सुरक्षित सीट 2015 के विधानसभा चुनाव में यह सीट महा गठबंधन ने जीती थी राजद के उपेंद्र पासवान यहां से विधायक बने थे 2020 चुनाव में महागठबंधन में सीटों के बंटवारे में यह सीट वामदल के खाते में चली गई और भाजपा से टिकट के लिए प्रयासरत पूर्व विधायक रामानंद राम भाजपा से टिकट न मिलने पर जाप में चले गए जिसके बाद बखरी में मुकाबला त्रिकोणीय बना हुआ है भाजपा ने अपने कार्यकर्ता राम शंकर पासवान को टिकट देकर एनडीए का कैंडिडेट बनाया है तो बखरी में अभी मुकाबला त्रिकोणीय दिख रहा है महागठबंधन प्रत्याशी एनडीए प्रत्याशी और पूर्व विधायक के जाप टिकट से उतरने से मामला त्रिकोणीय है।

दूसरा साहेबपुरकमाल विधानसभा सीट साहेबपुरकमाल विधानसभा सीट का इतिहास कहता है कि यहां से जीते हुए विधायक ज्यादा समय तक बिहार सरकार में मंत्री बने बावजूद इसके साहेबपुरकमाल सीट की चिर परिचित मांग मुंगेर पुल का सुचारु रुप से शुरू न हो पाना तमाम जनप्रतिनिधियों के ऊपर करारा तमाचा है। 2015 में यहां से राजद के वरिष्ठ नेता व लगातार 40 वर्षों से क्षेत्र में धाक रखने वाले नेता श्री नारायण यादव विधायक बनने से पहले वह बिहार सरकार में पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं। और वर्तमान में 2020 की बात करें तो यहां से सिटिंग विधायक श्री यादव के बेटे को टिकट देकर गठबंधन का उम्मीदवार बनाया है और यहां से लोजपा ने भी कैंडिडेट खड़ा किया है और जदयू के टिकट पर भाजपा के एक नेता जो पहले भाजपा के टिकट से इस सीट पर चुनाव लड़ चुके थे। इस बार समीकरण के लिहाज लोजपा ने साहेबपुरकमाल विधानसभा सीट पर भी मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। राजद का माय समीकरण इस क्षेत्र में प्रभावी दिख रहा है लेकिन ज्यादा प्रभावी होने से राजद के कैंडिडेट सबसे मजबूत दिख रहे हैं।

तीसरा – मटिहानी सीट बेगूसराय का सबसे हॉट सीट 2015 में भी हॉट था और 2020 में भी हॉट है। 2015 में बोगो सिंह लगातार जीत दर्ज करने के बाद 15 साल के कार्यकाल में दाखिल हुए थे और उस समय महागठबंधन से जीत दर्ज किए थे और भाजपा के सर्वेश सिंह और कांग्रेस के सारजन सिंह के बीच लेकिन वह लोग काफी पीछे छूट गए और बोगो सिंह अपने 15 साल के कार्यकाल में पदार्पण कर चुके थे 2020 में कांग्रेस के सारजन सिंह टिकट के लिए इच्छुक थे लेकिन महागठबंधन में टिकट बंटवारा के दौरान सीट बामदल के खाते में चली गई जिसके बाद वाम दल जदयू के सिटिंग विधायक बोगो सिंह एनडीए कैंडिडेट और स्व कामदेव सिंह के पुत्र राजकुमार सिंह ने लोजपा के टिकट से क्षेत्र में सियासी पारा बढ़ा दिया ग्राउंड जीरो की बात करें तो लोजपा के राजकुमार सिंह फाइट में बने हुए हैं यहां पर बोगो सिंह और राजकुमार सिंह में सीधा फाइट होगा।

चौथा – तेघड़ा विधानसभा सीट का अपडेट तेघरा विधानसभा क्षेत्र अपने आप में अजूबा बन चुका है इस बार चेहरा का लड़ाई भी त्रिकोणीय है। तेघड़ा विधानसभा सीट का सियासी इतिहास की बात करें तो यहां पर वामपंथ का गढ़ रहा है । 2010 में वामपंथ के किला ढहाने वाले भाजपा के पूर्व विधायक इस बार यहां से लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं जदयू के टिकट पर पूर्व सिटिंग विधायक वीरेंद्र महतो चुनाव लड़ रहे हैं जो 2015 में राजद के टिकट से यहां चुनाव लड़े थे क्षेत्र की जनता का आरोप था कि वह जीतने के बाद नजर नहीं आए जो इनके लिए सबसे कमजोर कड़ी इस चुनाव में साबित हो रही है। वहीं महागठबंधन के तरफ से राम रतन सिंह के बीच है। मामला त्रिकोणीय दिख रहा है महागठबंधन और लोजपा के उम्मीदवार में फाइट होने के आसार बन रहे हैं।

पांचवां – बछवारा विधानसभा सीट अपडेट बछवारा विधानसभा सीट पर बीजेपी के लिए जीत दर्ज करना टेढ़ी खीर साबित हो रही है। 2010 विधानसभा चुनाव में प्रदेश नेतृत्व के द्वारा टिकट वितरण में की गई एक गलती की वजह से आज तक बीजेपी यहां से सत्ता से वंचित रही है। तब 2010 में यहां से वामपंथ के उम्मीदवार अवधेश राय जो अभी भी महागठबंधन से उम्मीदवार हैं वह विधायक बनाए थे इसके बाद 2015 में महागठबंधन के लहर में स्वर्गीय रामदेव यहां से विधायक चुने गए जो कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और 2020 में यहां से महागठबंधन के उम्मीदवार और एनडीए के उम्मीदवार के रूप में भाजपा के पूर्व विधायक जो बेगूसराय सदर से टिकट की चाह रहे थे उनको पार्टी द्वारा सीट से लड़ा और निर्दलीय इंदिरा देवी गरीबदास के साथ पार्टी के भी एक गया है लेकिन चुनावी यहां काफी जोर-शोर के बाद भाजपा के कैंडिडेट पूर्व विधायक सुरेंद्र मेहता बेहतर स्थिति में दिख रहे हैं महागठबंधन और भाजपा में फाइट होने के आसार हैं जहां पर अब तक की स्थिति में एनडीए के कैंडिडेट सुरेंद्र नेता काफी काफी बेहतर स्थिति में दिख रहे है।

छठा – बेगूसराय सदर विधानसभा सीट सदर सीट पर महा मुकाबला हो रहा है यहां पर कांग्रेस और भाजपा में सीधी फाइट है। जिसको लेकर निर्दलीयों ने महागठबंधन और एनडीए कैंडिडेट की परेशानी बढ़ा दी है। शहरी क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा दोनों बराबर लीड लेते हुए दिख रही है। वहीं देहाती क्षेत्र में अगर बात करें तो विधायक की सर्व सुलभ ना होने से और सड़क की समस्या होने से यह एक बड़ा फैक्टर महागठबंधन प्रत्याशियों के लिए परेशानी खड़ा करने का काम कर सकती है। वहीं दूसरी तरफ निर्दलीय कैंडिडेट डॉ मीरा सिंह, प्रो संजय गौतम और राजेश मुखिया यह तीन कंडीडेट दोनों मेन फ्रंट के कंडिडेट के लिए खतरे की घण्टी बजा दिये है।

सातवां – चेरिया बरियारपुर विधानसभा सीट चेरिया बरियारपुर की जनता ने विधायक परिवर्तन करने का मूड साफ दिख रहा है। वोट बैंक समीकरण के लिहाज से भी राजद के राजवंशी महतों काफी आगे चल रहे हैं। वहीं लोजपा ने यहां पर त्रिकोणीय समीकरण बनाया था । जिसके बाद से जनता में सत्ता परिवर्तन की लहर होने से सत्ताधारी दल के कैंडिडेट को बचाते हुए राजद और लोजपा के कैंडिडेट बेहतर स्थिति में चल रहे हैं। वही आरएलएसपी के कैंडिडेट सुदर्शन सिंह असदुद्दीन ओवैसी की चुनावी जनसभा करवा कर अपने पैर में खुद कुल्हाड़ी मारकर रेस से बाहर होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। कुल मिलाकर इस विधानसभा का ताजा अपडेट के मुताबिक राजद और लोजपा में यहां पर भिड़ंत होने के आसार हैं।