अंधविश्वास से बचिए: देश में महामारी से निजात के लिए सुबह शाम जल चढ़ाकर “कोरोना माई” की जा रही है पूजा

Corona Mai

डेस्क : संपूर्ण भारतवर्ष में कोरोना काल को लेकर लोग डरे और सहमे है। लेकिन, इसी बीच बिहार के पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश के विभिन्न गांवों में अब अंधविश्वास पैदा हो उठा है। गोरखपुर में कई महिलाएं इस बीमारी को दैवीय आपदा मानकर सुबह और शाम “कोरोना माई” के नाम सेे जल चढ़ा रही हैं। धीरे धीरे यह सिलसिला गांवों से होकर शहरों तक पहुंच गया है। महिलाओं की माने तो कोरोना देवी की पूजा कर इस बीमारी से निजात पाई जा सकती है। इसके लिए सुबह करीब 5 बजे महिलाएं जल में नीम के पत्ते डालकर देवी पर चढ़ा रहीं हैं। बताया जा रहा है कि 5 दिन जल अभिषेक हो चुका है। और अब सातवें दिन पक्की धार (हल्दी, नारियल और गुड़) चढ़ेगी। इसके बाद देवी को कढ़ाही (हलवा-पूड़ी) चढ़ाई जाएगी। इन महिलाओं का मानना है कि 7 दिन धार चढ़ाने से देवी खुश हो जाएंगी और सातवें दिन वे सभी की प्रार्थना स्वीकार कर इस महामारी को खुद में समाहित कर दुनिया को इससे मुक्त कर देंगी।

जंगल में आग की तरह बात फैली रही है: ऐसा नहीं है कि इस तरह की पूजा सिर्फ गांव-देहात या सिर्फ कम पढ़ी-लिखी महिलाएं ही कर रही हैं। इस पूजा की खबर सिर्फ 5 दिन में जंगल में आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते शहर की महिलाएं भी ऐसा करने लगी हैं। शहर की महिलाओं का मानना है कि कोई दवा या वैक्सीन इस बीमारी पर काम नहीं कर रही है। ऐसे में अब यही इकलौता विकल्प है। अब सब कुछ ईश्वर के ही हाथों में है। हमें सनातन धर्म पर विश्वास है कि अब यह महामारी जल्द ही खत्म हो जाएगी।

यह आस्था नहीं अंधविश्वास है इससे बचिए: अक्षय ज्योतिष संस्थान के पंडित बताते हैं कि आस्था वह होती है। जिसमें विश्वास हो। जब ईश्वर, गुरु पर विश्वास होता है तो कि इनसे सभी काम बन जाएंगे तो उसे आस्था कहते हैं। जहां पर आस्था अज्ञानता का आवरण लेती है। वह अंधविश्वास होता है। कभी-कभी अपनी महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए व्यक्ति वह सबकुछ करने लगता है। जो अज्ञानता का पर्याय हो जाता तो वह अंधविश्वास हो जाता है। आस्था व्यक्ति को सबल बनाती है। जबकि अंधविश्वास व्यक्ति को दुर्बल बना देता है। जब किसी कष्ट से निपटने के सभी रास्ते बंद हो जांए और ईश्वर ही एक मात्र सहारा दिख रहा हो, तो ईश्वर तक अपनी प्रार्थना पहुंचाने के लिए ऐसे रास्तों को अपनाया जाना, जिसमें लाभ कम बल्कि नुकसान होने की आशंका ज्यादा हो तो वह आस्था न रहकर अंधविश्वास का रूप धारण करता है।

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