विश्लेषण : जानिये क्या खास है बेगूसराय के भाजपा जिलाध्यक्ष राजकिशोर सिंह के एक साल के कार्यकाल में

Raj Kishor Singh

न्यूज डेस्क , बेगूसराय : भाजपा बेगूसराय के जिलाध्यक्ष राजकिशोर सिंह अपने कार्यकाल के एक साल पूरे किये । आर एस एस से जुडे रामदीरी निवासी, विकास विद्यालय के निदेशक राजकिशोर सिंह के भाजपा के बेगूसराय जिलाध्यक्ष बनने से जिले में एक नए आयाम और युग की शुरुआत हुई थी। भाजपा संगठन यूं तो पिछले कई वर्षों से जिले में सभी पार्टियों को पीछे छोड़ते सांगठनिक ऊंचाई को छूती रही थी। लेकिन पिछले दो बरसों में हुए दो चुनावों में इसकी सफलता बढ़ी।

तमाम आकलन को पीछे छोड़ते लोकसभा चुनाव में बड़ी सफलता के बाद विधानसभा चुनाव में भी तीन मिली सीटों में दो पर कब्जा कर भाजपा ने सफलता पा ली। दरभंगा विधान परिषद के चुनाव में भी उसके एक समर्थक स्नातक सीट पर कब्जा जमाने में सफल रहे। अलबत्ता शिक्षक निर्वाचन में समर्थित प्रत्याशी की हार एक असफलता मानी जा सकती है। विधानसभा चुनाव में पार्टी में विद्रोहियों के तेवर तेज रहे और की स्वंय ही अपने दलीय उम्मीदवार को हराने के लिए पार्टी के विद्रोही प्रत्याशी बन बैठे। भीतरघात और विद्रोह ने बखरी क्षेत्र में करामात दिखाया और पार्टी के उम्मीदवार चुनाव हार गए। अध्यक्ष के रूप में श्री सिंह उसपर लगाम लगाने में असफल रहे।

वे न तो उन्हें दलीय अनुशासन में बांधे रह सके और न ही उनपर कोई कारवाई करवा सके। दलीय अनुशासन तोड़ने में पुराने कार्यकर्ता और जिला के सांगठनिक अधिकारी के पद पर बैठे लोग भी रहे। जिनपर अध्यक्ष का अनुशासन लागू नहीं हो सका। जिले में वाम दल और महागठबंधन की चुनौतियां बरकरार रहीं। अलबत्ता देश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की ज़िले में चुनौती खत्म सी हो गई। इनके कार्यकाल में उसके एक भी विधायक जिले में नहीं रहे। सीपीआई के दो विधायकों का जीतना भी इनके कार्यकाल की चुनौती मानी जा सकती है। इनके गृह प्रखंड में भाजपा समर्थित एनडीए उम्मीदवार की हार भी चर्चा में रही।

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