जानिये ! आखिर बेगूसराय के औद्योगिक नगरी बरौनी के नाम का उत्पत्ति कहाँ से हुआ ?

Baruani

न्यूज डेस्क : चैत्र कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को शतभिषा नक्षत्र जब हो तब वारुणी योग लगता है और अगर चैत्र कृष्ण पक्ष त्रयोदशी शतभिषा नक्षत्र शनिवार युक्त हो तो महावारुणी में योग लगता है माना गया है। इस वर्ष वारुणी योग है। अंग्रेजी तारीख के अनुसार 9 अप्रैल 2021 को 5 बजकर 45 मिंट में सूर्योदय हुआ । जिसके पश्चात 34 पल के लिए अर्थात प्रातः 5 बजकर 45 मिंट से प्रातः 5 बजकर 59 मिंट तक शतभिषा नक्षत्र वारुणी योग रहा ।

गंगा के उत्तरी भाग में खास करके मिथिलांचल के क्षेत्र में वारुणी योग का अपना काफी महत्व रहा है। पौराणिक ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार दरभंगा मधुबनी एवं नेपाल आदि क्षेत्रों से लोग गंगा स्नान करने के लिए बेगूसराय जिले के विभिन्न घाटों पर वर्षों से आते रहे हैं।आज संसाधनों कि प्रचुरता होने पर लोग रेलगाड़ी एवं मोटर वाहनों से सिमरिया घाट तक स्नान के लिए आते हैं लेकिन वर्षो पूर्व जब संसाधन का अभाव था और लोग पैदल यात्रा करके गंगा स्नान का पुण्य लाभ लेने के लिए आते थे उस समय झमटिया घाट से लेकर सिमरिया घाट तक के विभिन्न घाटों पर मिथिलांचल के लोग स्नान कर पुण्य लाभ लेते रहे हैं।

बरौनी नाम का है इस योग का सम्बंध ज्योतिषाचार्य सह भारतीय शिक्षण मण्डल के जिला मंत्री अविनाश शास्त्री अनुसार वारुणी शब्द का ही अपभ्रंश बरौनी है। भारत के प्रमुख शहरों के नाम के पीछे भारत की सभ्यता संस्कृति के साथ साथ उनके शास्त्रिक,ऐतिहासिक एवं प्रमाणिक पौराणिक महत्व भी हैं। जैसे कि पटन देवी के नाम पर पाटलिपुत्र का ही अपभ्रंश नाम पटना है। उसी प्रकार से मिथिलांचल के लोग पैदल यात्रा करते हुए वारुणी युग में बेगूसराय जिले के तत्कालीन बरौनी फ्लैग घाट की घटकिंडी दुर्गा स्थान के निकट घाट पर स्नान करने के लिए आते थे।

बरसों तक समस्तीपुर से बेगूसराय आने का पैदल मार्ग बरौनी फ्लैग के घट किंडी दुर्गा स्थान के बगल से ही था जिस स्थान पर वारुणी योग में लोग स्नान करते थे वही गांव वारुणी गांव जिसका अपभ्रंश बरौनी गांव हो गया घाट किनारे की भगवती दुर्गा अपभ्रंश घट किंडी दुर्गा हो गई। तत्कालीन बरौनी के पास से ही गंगा की धारा गुजरती थी और वहां दरभंगा मधुबनी आदि क्षेत्रों से गंगा यात्री पैदल वारुणी योग में स्नान करने के लिए आते थे। वारुणी स्नान के ही नाम से वारुणी अपभ्रंश बरौनी हुआ है। हालांकि स्थान के नाम की सत्यता कुछ भी हो लेकिन ज्योतिष ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वारुणी योग में गंगा स्नान करना पुण्य लाभ कारी होताहै। कोविद संक्रमण महामारी को देखते हुए गंगा के तटों पर भीड़ भाड़ से बचने के लिए लोगों को उक्त पुण्य बेला में घर में ही गंगा का ध्यान करके स्नान करना चाहिए।

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