बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को परिलक्षित करती है श्री विश्वबंधु पुस्तकालय बखरी : राकेश सिन्हा

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बेगूसराय : बखरी जैसे सूदूरवर्ती जगहों पर भी लोगों ने अभावों में रहकर श्रीविश्वबंधु पुस्तकालय जैसे समृद्ध पुस्तकालय की स्थापना की है। यह यहां की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को परिलक्षित करता है। पुस्तकालय ज्ञान का मंदिर है और संस्कृति की पाठशाला भी। यह बातें राज्यसभा सदस्य प्रो. राकेश सिन्हा ने मंगलवार को श्रीविश्वबंधु पुस्तकालय बखरी में बखरी के समग्र विकास को लेकर आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि 1956 में स्थापित यह पुस्तकालय सात दशक बाद भी लोगों को पुस्तकों में छिपे ज्ञान के अथाह भंडार के साथ-साथ अब कम्प्यूटर के बेसिक ज्ञान से भी परिचय करवा रहा है। इस दौरान उन्होंने पुस्तकालय को पांच कम्प्यूटर सेट देने के अलावा नये भवन निर्माण के लिए अपनी ओर से प्रशासनिक पहल किये जाने की घोषणा की। इस मौके पर अभाविप के नगर अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बखरी में डिग्री कालेज खोलने के संबंध में प्रशासनिक निष्क्रियता का मामला उठाया। नगर पार्षद नीरज नवीन ने नगर पंचायत के वार्ड 15 में स्वास्थ्य उप केंद्र खुलवाने की मांग की।

जबकि, नगर पार्षद सिंधेश आर्य ने रेल विभाग की उदासीनता का मामला गंभीरता से उठाते हुए उसके समाधान की मांग किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुस्तकालय के अध्यक्ष डाॅ. विशाल केसरी तथा संचालन सचिव डाॅ. आलोक ने किया। परिचर्चा के बाद राकेश सिन्हा ने कचरा से भरे श्रीविश्वबंधु पुस्तकालय तालाब का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए हवा और पानी का शुद्ध रहना आवश्यक है। सरकार प्राकृतिक जल स्त्रोतों की शुद्धता तथा जल संरक्षण के प्रति लगातार प्रयत्नशील है। सफाई पर भी लाखों खर्च किये जा रहे हैं। इसके बाद भी तालाब और उसके मुहार पर पसरी गंदगी प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खङा कर रही है। जबकि पुस्तकालय और तालाब के ठीक बगल में नगर पंचायत कार्यालय है।

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