अब सड़कों से हट जाएंगे Toll Booth, जानें – फिर आपके अकाउंट से कैसे कटेंगे Toll Tax..

Toll Booth India

डेस्क : सड़क के बुनियादी ढांचे को और बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में अपने हालिया भाषण में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ये भी साफ कर दिया है कि सरकार भारतीय सड़कों और राजमार्गों पर यातायात का प्रबंधन करने के लिए प्रमुख प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की तैयारियों में जुट गई है।

राष्ट्रीय राजमार्गों यानी National Highway से टोल प्लाजा को समाप्त करने के उद्देश्य से, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भारत में टोलिंग आधारित ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) पर एक दिन का परामर्श कार्यशाला का आयोजित हुआ था।

कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न उद्योग विशेषज्ञों और हितधारकों से जीएनएसएस-आधारित टोलिंग प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर इनपुट और सुझाव को लेकर बात रखी गई। कार्यशाला जीएनएसएस प्रौद्योगिकी के आधार पर भारत में फ्री-फ्लो टोलिंग सिस्टम के लिए भविष्य के रोडमैप को रणनीतिक और डिजाइन करने में उपयोगी साबित होगी। प्रासंगिक सरकारी विभागों, इसरो, एनआईसी और उद्योग के लोगों जैसे वाहन निर्माता, एआईएस-140 ऑन-बोर्ड यूनिट (ओबीयू) निर्माताओं, वैश्विक जीएनएसएस सेवा प्रदाताओं, बैंकों, भुगतान एग्रीगेटर्स / गेटवे सेवा प्रदाताओं सहित विभिन्न हितधारकों को जीएनएसएस आधारित टोलिंग प्रणाली पर विचार-विमर्श भी किए गए।

जीएनएसएस आधारित टोलिंग के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर सलाहकारों और उद्योग विशेषज्ञों के साथ सत्र और प्रस्तुतियां का आयोजन किया गया था। दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर पर एनएचएआई द्वारा किए गए पायलट के निष्कर्षों और जीएनएसएस वास्तुकला के विभिन्न पहलुओं, भुगतान निपटान प्रक्रिया, प्रस्तावित प्रवर्तन जैसी बातों पर चर्चाएं हुईं। साथ ही उपायों और कानूनी ढांचे की आवश्यकताओं पर चर्चा पर भी बात हुई।

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अब कैसे टोल वसूलेगी सरकार : प्रस्तावित जीएनएसएस प्रौद्योगिकी के ऊपर आधारित टोलिंग वसूलने के तरीके में, एनएच खंड को जियो-फेंस्ड किया जाएगा और इसमें वर्चुअल टोलिंग पॉइंट को लाया जाएगा। जब भी जीएनएसएस ओबीयू से लैस कोई वाहन इस वर्चुअल टोलिंग पॉइंट से होकर गुजरेगा, तो यात्रा की गई दूरी की जानकारी की गणना बहु-नक्षत्रों जैसे एनएवीआईसी, जीपीएस आदि से उपग्रह संकेतों के आधार पर की जाएगी और लागू शुल्क की गणना केंद्रीय जीएनएसएस सॉफ्टवेयर सिस्टम द्वारा की जाएगी और ओबीयू से जुड़े उपयोगकर्ताओं के बैंक खाते से उस राशि को काट लिया जाएगा।